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महिला व बाल विकास विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा अनिवार्य

by bnnbharat.com
July 29, 2020
in समाचार
महिला व बाल विकास विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा अनिवार्य
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मध्यप्रदेश: प्राइवेट क्षेत्र में पूर्व से संचालित एवं नवीन संचालित होने वाले शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों को महिला व बाल विकास विभाग के पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा.

राष्ट्रीय ईसीसीई पॉलिसी 2013 एवं राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग के निर्देशानुसार प्राइवेट क्षेत्र में पूर्व से संचालित एवं नए संचालित होने वाले शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के नियमन एवं निगरानी के लिए यह निर्णय लिया गया है.

इन शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों की पंजीकरण की सुविधा 4 अगस्त 2020 से शुरू होगी. महिला व बाल विकास विभाग के पोर्टल पर पूर्व से संचालित एवं नवीन संचालित होने वाले शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराना आवश्यक होगा. बिना पंजीकरण के संचालित पाए जाने पर संबंधित शाला पूर्व शिक्षा केंद्र (नर्सरी स्कूल, प्ले स्कूल, किंडर गार्डन) पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी

महिला व बाल विकास विभाग के पोर्टल पर शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी वेबीनार 4 अगस्त को 3:00 बजे आयोजित किया गया है.

इसमें विभागीय संभागीय संयुक्त संचालक, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं निजी क्षेत्र के शाला पूर्व शिक्षा केंद्र संचालक सम्मिलित होंगे. ऑनलाइन वेबीनार में सम्मिलित होने से संबंधित लिंक विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध होगी.

उल्लेखनीय है कि बाल अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय ईसीसीई (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नीति) 2013 का निर्माण किया था.

इस नीति में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को शैक्षणिक आवश्यकताओं एवं इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए स्कूल पूर्व शिक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है. भारत में शाला पूर्व शिक्षा सेवाएं शासकीय निजी एवं अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से प्रदाय की जा रही है.

शासकीय क्षेत्र में शाला पूर्व शिक्षा सेवा का प्रदाय आंगनवाड़ी केंद्रों एवं अशासकीय क्षेत्रों में नर्सरी स्कूल, प्ले स्कूल, किंडर गार्डन जैसे नामों से संचालित शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है.

वर्तमान में प्राइवेट क्षेत्र में संचालित प्ले स्कूल बिना किसी नियमन, मान्यता एवं पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं जिससे इन शाला पूर्व शिक्षा केंद्रों में बाल अधिकारों के संरक्षण की सुनिश्चित्ता प्रभावित होती है.

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