देवघर: देवघर के प्रतिष्ठित व्यव्सायी अमरजीत मल्होत्रा को एक पोस्ट शेयर करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में सोशल साइट ट्विटर में बुधवार को अमरजीत मल्होत्रा को रिहा करो हैश टैग टॉप ट्रेंड कर रहा है.
देवघर के पालोजोरी थाना में अमरजीत मल्होत्रा के खिलाफ एक पोस्ट शेयर करने के ममले में 12 अप्रैल को धार्मिक विद्वेष फैलाने आदि का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत किया गया था.
पुलिस ने अमरजीत मल्होत्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सोशल मीडिया के धुरंधरों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया.
उनका मानना है कि झारखंड सरकार तुष्टिकरण के लिए पुलिस का दुरूपयोग कर रही है. इस दौरान भाजपा नेताओं को भी इस मामले में उदासीन रहने का आरोप लगाया जा रहा है.
देखते-देखते फेसबुक-ट्विटर पर यह मामला छा गया .
बुधवार को ट्विटर में यह मामला टॉप ट्रेंड कर रहा है .
सोशल मीडिया में सक्रिय कानून के जानकारों का कहना है कि पुलिस ने यह केस राजनीतिक दबाव में राजनीतिक तुष्टिकरण के लिए किया है.
उनका कहना है कि Complaint की कॉपी देखने के बाद प्रथमदृष्टया से साफ प्रतीत होता है कि ये एफआईआर mentainable नही है.
पोस्ट एक व्यक्ति के बारे में है.
पोस्ट में समाज शब्द का प्रयोग है, किसी धर्म का उल्लेख नहीं है.
चुकी किसी धर्म का उल्लेख नहीं है अतः यह किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला नहीं है.
इसलिए एफआईआर में लगाई गई धारा सैक्शन 295 आईपीसी आधारहीन और वैयमन्नश्य कि भावना से प्रेरित है.
और ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी पीछे किसी का राजनैतिक उदेश्या छिपा हुआ प्रतीत होता है.
इस पोस्ट में जिस व्यक्ति का नाम लिया गया है उसने कम्पलेंट फाइल नहीं किया है. और ना ही उसने शिकायतकर्त्ताओ को इसके लिए अधिकृत किया है.
एफआईआर में जिस फ़ेसबुक पोस्ट पर आपत्ति जताई गई है वह जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से साझा किया गया है किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से नहीं.
इससे प्रथम दृष्ट्या पुलिस की कार्यवाही संदिग्ध प्रतीत होती है.
आरोपी एक जमीदार और इज्जतदार व्यावसाई है जिनकी सामाजिक छवि को धूमिल करने का अनर्गल प्रयास किया गया है.
इस एफ आई आर के समय और परिस्थिति भी संदिग्ध है.जब कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने ये चेताया है कि कट्टरवादी संगठन इस विषाणु का दुरूपयोग एक जैविक हथियार के रूप में कर सकते हैं जिससे मिलती जुलती सैकड़ों घटनाएं समाचार पत्रों एवम समाचार चनलों क द्वारा प्रसारित किया गया है.
जिसमे इसमें एक खास जमात क लोगों द्वारा इस महामारी को फैलाने के विभिन्न प्रयासों का वर्णन मिल रहा है.
ऐसे में ये फ़ेसबुक पोस्ट अपराध की श्रेणी में नहीं आता है यह कानून का दुरुपयोग है कानून क रक्षकों क द्वारा.
इस एफ आई आर में जो धाराएं लगाया गया है वो निम्न है,505A,188A/34 आईपीसी
जो कि इस पोस्ट के संदर्भ में आधारहीन है.

