रांची: डी ए वी कपिलदेव पब्लिक स्कूल, कडरू, में आज स्वामी दयानंद जी को याद करते हुए ऋषि बोधोत्सव का आयोजन किया गया. इस अवसर पर स्वामी दयानंद जी की चित्र पर पुष्प अर्पित किये गए तथा विशेष हवन का आयोजन किया गया.
हवन के बाद प्राचार्य एम के सिन्हा ने कहा कि आज ही दिन स्वामी दयानंद जी को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. वे मूलशंकर से स्वामी दयानंद बने थे. उनके जीवन में शिवरात्रि का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने समाज सेवा के लिए जो कार्य किये, वे बहुत ही सराहनीय है.
अछूतों का उद्धार, विधवा विवाह, पाखंड का खंडन करना, पाखंड खंडिनी पताका हरिद्वार में फहराना तथा बडे़ बड़े धर्मशास्त्रियों से शास्त्रार्थ कर उन्होंने लोगों को बतला दिया कि सच्चा धर्म क्या है ? प्राचार्य ने कहा कि स्वामी दयानंद में करुणा कूट कूट कर भरी थी.
यहां तक की दूध में शीशा पीसकर मिलानेवाले रसोइये जगन्नाथ को उन्होंने खुद डेढ़ सौ रुपये दिये और नेपाल भाग जाने की सलाह दी थी ताकि उसकी जान बच सके जबकि खुद दयानंद जी की जान दूसरे दिन चली गई.
हवन के बाद विद्यालय के शिक्षकों और उपस्थित छात्रों ने ‘उठ जाग मुसाफिर भोर भई, आनंद दया के सागर को शत-शत बार नमन है मेरा’ जैसे कई भजन प्रस्तुत किये.
मौके पर सृजा, प्रिया तथा अन्य छात्र -छात्राओं ने स्वामी दयानंद जी जीवन पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर शिक्षक एस के राणा, अरुण कुमार मंडल, रुद्रकांत झा, पीएन झा, चिरसुंदर ठाकुर, विश्वनाथ चक्रवर्ती समेत सीनियर और जूनियर वर्ग के शिक्षक -शिक्षिकाएं तथा कर्मचारीगण मौजूद थे.

