रांची: रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद यादव एकमात्र ऐसे मरीज है, जिन्होंने लगभग दो साल तक रिम्स में रहने के दौरान प्रतिदिन 1000 रुपये के हिसाब से करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया. होटवार जेल से लालू प्रसाद को साल 2018 में इलाज के लिए रिम्स में शिफ्ट किया गया था और तब से लेकर वे लगातार रिम्स में ही इलाजरत है.
आरजेडी चीफ को सबसे पहले रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था, जहां आसपास कुत्ते रातभर शोर मचाते थे, जिसके कारण वह सो नहीं पाते थे. इसके बाद लालू प्रसाद की परेशानी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिम्स के ही 1000 रुपये प्रतिदिन वाले पेइंग वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां 6 सितंबर 2018 से वे अपना इलाज करा रहे है. बताय गया है कि लालू प्रसाद करीब एक दर्जन विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है.
कोरोना संक्रमण के कारण केली बंगला किया गया शिफ्ट
कोविड-19 वायरस के फैलाव और लालू प्रसाद के दो सेवकों तथा कुछ सुरक्षा कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उनपर भी कोरोना का खतरा मंडराने लगा. वहीं रिम्स प्रबंधन की ओर से कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर पेइंग वार्ड को भी कोविड वार्ड में बदलने की योजना बनायी गयी, इस कारण लालू प्रसाद यादव को पेइंग वार्ड से रिम्स निदेशक के खाली पड़े केली बंगले में शिफ्ट किया गया.
लालू प्रसाद यादव को पेइंग वार्ड में सिर्फ एक कमरा मिला था, लेकिन उनके सेवकों और सुरक्षा कर्मियों ने आरजेडी प्रमुख की सुरक्षा के मद्देनजर पूरे तल्ले पर स्थित पेइंग वार्ड के एक दर्जन से अधिक कमरों पर कब्जा जमा कर रखा था. इस कारण रिम्स प्रबंधन को रही परेशानी को देखते हुए लालू प्रसाद को केली बंगला में शिफ्ट कर दिया गया.
केली बंगले के ईद-गिर्द बिहार आरजेडी नेताओं का लग रहा है जमावड़ा
रिम्स के केली बंगले में लालू प्रसाद यादव को शिफ्ट कर दिये जाने के बाद बंगले के ईद-गिर्द बिहार आरजेडी नेताओं का जमावड़ा लग रहा है. हालांकि जेल मैनुअल के अनुसार पूर्व में लालू प्रसाद यादव को सप्ताह में एक दिन शनिवार को सिर्फ तीन मुलाकातियों से मिलने की अनुमति दी जाती थी, लेकिन कोरोना काल में विशेष परिस्थिति में लालू प्रसाद की सहमति से कुछ लोगों को मुलाकात दी जा रही है.
दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं का आरोप है कि केली बंगले में लालू प्रसाद से लगातार कई लोग बिना जेल प्रशासन की अनुमति के मुलाकात कर रहे है और प्रशासन पूरे मामले को नजरअंदाज कर रखा है. जबकि मीडिया में यह मामला सुर्खियों में आने के बाद जेल आईजी द्वारा लिखे गये पत्र को आधार बनाते हुए जिला प्रशासन की ओर से केली बंगले की निगरानी के लिए तीन दंडाधिकारियों की भी प्रतिनियुक्ति की है.
दूसरी तरफ लालू प्रसाद को फिर से वापस बिरसा मुंडा जेल भेज कर उन्हें जेल में ही चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर हाईकार्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गयी है.

