राज्य में सभी विद्यालयों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) के तहत कक्षा आठ तक मान्यता लेना अनिवार्य है. मान्यता नहीं लेनेवाले स्कूलों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है. राज्य में सात हजार से ज्यादा ऐसे निजी विद्यालय है. इन विद्यालयों को RTE के तहत मान्यता प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा जमीन को लेकर है. जिस कारण से इन्हें मान्यता नही मिल पायी है. इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने नियमावली में संशोधन की बात कही है. इसके तहत निजी स्कूलों को मान्यता लेने के लिए नियमावली में तय भूमि की शर्त में बदलाव हो सकता है.
शिक्षा विभाग ने संशोधन को लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है. राज्य में वर्ष 2011 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था. फिर वर्ष 2019 में नियमावली में पहला संशोधन हुआ और अब दूसरा संशोधन होगा. संसोधन से निजी स्कूल के संचालकों को राहत मिलेगी. बता दें कि अधिकतर राज्यों में स्कूलों की मान्यता के लिए जमीन की शर्त नहीं है.अधिनियम के तहत सीबीएसइ व जैक बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों को भी कक्षा एक से आठ तक के लिए मान्यता लेने का प्रावधान है. स्कूलों को मान्यता के लिए भूमि की शर्त से छूट दी जा सकती है. स्कूल में कक्षा के अनुरूप कमरा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल का मैदान समेत अन्य संसाधन की आवश्यकता को तय किया जा सकता है.

