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प्राइवेट हॉस्पिटल को फायदा पहुंचाने के लिए की गई नियमों की अनदेखी, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं

by bnnbharat.com
January 16, 2021
in समाचार
प्राइवेट हॉस्पिटल को फायदा पहुंचाने के लिए की गई नियमों की अनदेखी, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं
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मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद भी अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई.

जिला परिषद ने भवन बैंक को देने का फैसला लिया पर अफसरों ने दे दिया अरोग्यम अस्पताल को.

तत्कालीन डीडीसी और जिला अभियंता पर मिली-भगत से निजी हॉस्पिटल आरोग्यम को लाभ पहुँचाने का आरोप.

आरोप है कि पूर्व निर्धारित मैनेज्ड टेंडर के माध्यम से जिला परिषद का भवन दे दिया गया आरोग्यम को.

प्रक्रिया, लीज या एग्रीमेंट की जानकारी नहीं है जिला परिषद अद्द्यक्षा को.

सूत्रों की माने तो पर्सनल रिलेशन पर दे दिया गया नगर परिषद का पुराना भवन कौड़ी के दाम.

हजारीबाग: हजारीबाग जिला परिषद के पुराने कार्यालय भवन को निजी अस्पताल अरोग्यम को किराये पर दे दिया गया है. ऐसा करने से पहले नियमों का पालन नहीं किया गया. इससे वहां की जिला परिषद अध्यक्ष सुशीला देवी नाराज होकर अवैध तरीके से भवन को किराये पर लगाने की शिकायत राज्य के मुख्यमंत्री से की थी और से निष्पक्ष जांच की गुहार भी लगाई थी. लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. 

इस प्रकरण में BNN BHARAT ने जब जिला परिषद अध्यक्ष सुशीला देवी से बात की तो उन्होंने कहा, ऑफिसरों ने सभी नियम-कानून को ताख पर रखकर बिना मेरी जानकारी  के किया है. इस मामले को लेकर जिला परिषद और उपविकास आयुक्त (डीडीसी) के कई बार आमने-सामने हो चुके हैं.

सुशीला देवी ने बताया कि सितंबर 2018 को जिला परिषद की एक बैठक आहुत की गयी थी. बैठक में पुराने कार्यालय भवन को बैंक ऑफ इंडिया को किराया पर देने को लेकर प्रस्ताव पास हुआ था. जिसमें किराया निर्धारण, नियम और शर्त बाद में तय किया जाना था. लेकिन जिला परिषद के कार्यापालक पदाधिकारी सह डीडीसी और जिला अभियंता ने मनमाने तरीके से किसी अन्य एजेंसी को उक्त भवन किराया पर दे दिया. इस काम के लिए जिला परिषद से अनुमति तक नहीं ली गयी.

सुशीला देवी का कहना है कि डीडीसी और अभियंता की मिलीभगत से बैंक ऑफ इंडिया की जगह जिस निजी एजेंसी को पुराने भवन को किराया पर दिया है, वहां आरोग्यम अस्पताल खोला गया है. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की सहमति के बिना यह भवन आरोग्यम को दिया गया है. बाद में भी यह जानकारी परिषद को नहीं दी गयी है कि आखिर किन कारणों से बैंक ऑफ इंडिया को किराये पर भवन नहीं दिया गया.

जिला परिषद का कहना है कि निजी स्वार्थ को ध्यान में रख यह भवन दूसरे निजी एजेंसी को दिया गया है. स्थिति अब यह है कि अस्पताल प्रबंधक धीरे-धीरे जिला परिषद के सारे बिल्डिंग कार्यालय को हड़पने की साजिश रच रहा है.

जानकारी यह भी है कि जिला परिषद अध्यक्षा ने डीसी को इस बारे में पत्र लिखकर पूरी जानकारी भी दी है. जिला परिषद अध्यक्ष के आरोपों को लेकर BNN BHARAT ने हजारीबाग के तत्कालीन डीडीसी से संपर्क करने की कोशिश की पर उनसे संपर्क नहीं हो सका.

अगली कड़ी में हम खुलासा करेंगे कि कैसे और किन किन नियमों की हुई अनदेखी. और किन शर्तों पर उक्त भवन दिया गया आरोग्यम को और क्या है लीज एग्रीमेंट में.

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