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स्कूल बंद होने के बावजूद सहरिया बच्चों को अक्षर ज्ञान सिखा रहे है नंदलाल

by bnnbharat.com
September 7, 2020
in समाचार
स्कूल बंद होने के बावजूद सहरिया बच्चों को अक्षर ज्ञान सिखा रहे है नंदलाल
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श्योपुर: जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के निवासी रिटायर्ड शिक्षक नंदलाल आदिवासी कोरोना संक्रमण के दौरान सहरिया बच्चों को गांव-गांव चलित पाठशाला के माध्यम से उन्ही की भाषा में अपने अनूठे जज्बे के साथ अक्षर ज्ञान प्रदान करने में सहायक बन रहे है. 

आदिवासी विकासखंड कराहल के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक नंदलाल रिडायर्ड होने के बाद शिक्षक का लिबास ही बच्चो को आला की तर्ज कर गाकर कराते है. सहरिया मातृ भाषा में अक्षर ज्ञान प्रदान करने में सहायक बन रहे है. उनको वर्णमाला की रचना एवं मौलिक शिक्षा पद्धति के लिए राष्ट्रपति सम्मान मिला है.

रिटायर्ड शिक्षक नंदलाल आदिवासी कोरोना काल में सभी सरकारी और निजी स्कूल भले ही बच्चों के लिए बंद है. लेकिन आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड कराहल में सहरिया बच्चो के लिए चलता-फिरता स्कूल बन गये है. उनका जुनून और जज्बा कोरोना काल में भी सहरिया बच्चों को उन्ही की भाषा में अक्षर ज्ञान करा रहा है. बच्चों को पढाने के लिए डमरू बजाकर पाठशाला में एकत्रित करते है.

क्षेत्र के अलावा अपने घर पर भी आने वाले बच्चों को पूरी मुस्तैदी के साथ पढ़ा रहे है. पिछले 08 साल से गांव-गांव और बस्ती-बस्ती जाकर सहरिया बच्चों में पढ़ाई की अभिरूचि पैदा करने के लिए रिटायर्ड शिक्षक नंदलाल अल्हा उदल की तर्ज पर बच्चों को गीत सुनाकर उनके मन को मोहने में सहायक बन रहे है.

धोती-कुर्ता व जैकेट उनका पहनने का शौक है. उन्होने अपने जैकेट के पीछे चलती-फिरती पाठशाला भी लिख रखी है. वही उनके कुर्ते पर शिक्षा के महत्व को दर्शाते प्रेरणादायक वाक्य लिखवा रखे है. उनका पढ़ाने का अदांज भी सबसे अलग है. सहरिया बच्चों को उनकी बोलचाल की भाषा में अंक और अक्षर ज्ञान कराते है. रिटायर्ड होने के पहले सन 2010 में उनको राष्ट्रपति सम्मान सहित 03 राष्ट्रीय पुरूस्कार दिये गये है.

कोरोना काल में सिर्फ इतना अंतर आया है कि पिछले 04 महीने से कराहल क्षेत्र के आस-पास गांव/बस्तियों में जाकर सहरिया परिवारों के छात्रों को उनकी भाषा में वर्णमाला का ज्ञान प्रदान कर रहे है.

रिटायर्ड शिक्षक नदंलाल द्वारा हाई स्कूल तक पढ़ाई करने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम में शिक्षक के पद पर कार्य किया. स्वरूचि वर्णमाला और मौलिक शिक्षा पद्धति अपनाने के लिए उन्हें दिल्ली में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया था. इससे पूर्व राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा राज्य स्तरीय पुरूस्कार दिया गया.

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