जेएसपीएल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हो रही है अग्रसर
चतरा:- आज हम बात करने जा रहे हैं झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की. यानी जेएसएलपीएस ग्रामीण विकास विभाग का एक अभिन्न अंग है जिसमें सखी मंडल समूह का गठन कर उन्हें स्वरोजगार के प्रति जागरूक किया जाता है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सखी मंडल समूह का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संस्था द्वारा बैंकों से ऋण उपलब्ध करवाकर उन्हें आय के विभिन्न संसाधनों से जोड़ने की पहल की जाती है. जिसका यह परिणाम है आज हमारी महिलाएं उन्नत किस्म की खेती के साथ-साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन व किचन गार्डन के क्षेत्र में और मौसमी फसलों की खेती-बाड़ी करने तथा अन्य कई माध्यमों से इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पोषण अभियान के तहत भी लोगो को जागरूक करने जैसे अनेकों मुख्य कार्य किए जा रहे हैं.
दरअसल हम बात कर रहे है चतरा जिले के अति पिछड़ा और सर्वाधिक नक्सल प्रभावी क्षेत्र माने जाने वाला कुंदा प्रखंड की. जहां 2017 में जेएसएलपीएस का कार्य प्रारंभ हुआ था. वही आज जेएसएलपीएस लगभग 462 महिला समूहों का गठन कर चुकी है और इनमें से 215 समूहों के बीच बैंक के द्वारा दो-दो लाख का ऋण स्वीकृत करवाया गया है. आज लोग ग्रामीण क्षेत्रों में अपने तरीके व पसंद के मुताबिक कार्य कर रहे हैं. महिलाएं अब घर तक सीमित नहीं रह गई है. सखी मंडल के कुछ दीदियाँ कहती है कि पहले हमलोग बेकार बैठे रहते थे. लेकिन आज आजीविका सखी मंडल का गठन होने से अपने अनुरूप बैंकों से ऋण लेकर कार्य कर रहे हैं. कम ब्याज दर पर जेएसएलपीएस के माध्यम से बैंक के द्वारा ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है. महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही है. वही बातचीत के दौरान सखी मंडल के एक महिला के द्वारा बताया गया कि समूह से जुड़ने से पहले हड़िया व महुआ बनाया करती थी. जो अब सखी मंडल से जुड़ने के बाद छोड़ चुकी हैं. अब ये बकरी पालन, मुर्गी पालन व मछली पालन आदि का काम बखूबी कर रहे हैं. जेएसएलपीएस के बीपीएम यानी प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक दीपक कुमार सिंह ने बताया कि मिशन नवजीवन के तहत सड़क किनारे हड़िया-दारू बेचने वाले महिलाओं को अन्य रोजगार उपलब्ध करवाकर हड़िया-दारू बंद करने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है. जेएसएलपीएस 15 सौ रुपये में मात्र दो लाख मछली का जीरा उपलब्ध करवा रही है तथा मौसमी फसल के समय कम दर पर बीज उपलब्ध करवाती है. उन्होंने बताया कि सखी मंडल की दीदियाँ अब पूर्णतः आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर तो हो ही रही है और समृद्धि की ओर भी बढ़ती जा रही है.
