दुमका: जब इरादे मजबूत हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी छोटी लगने लगती है. कोरोना का कहर पूरे विश्व में त्रासदी मचा रहा है. लोग भयभीत होकर घरों में रहने को मजबूर है. कुछ मिसाल ऐसे हैं, जो कोरोना से जंग लड़ने को निकल पड़े हैं. ये केवल एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य ही नहीं, बल्कि समाज मे एक आदर्श की मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं.
कहते हैं बुलंद हौसलों की कोई उम्र सीमा नहीं होती. ऐसी ही मिसाल पेश की है मुरभंगा गांव के 81 वर्षीय बाबूराम हेम्ब्रम ने एक किमी दूर साइकिल से यात्रा कर काठीकुंड की कालाझार पंचायत अंतर्गत उत्क्रमिक मध्य विद्यालय, दलदली में बनाये गए टीका केंद्र पहुंच कर कोविड-19 का टीकाकरण कराया.
बाबूराम हेम्ब्रम किसी आम व्यक्ति की तरह चल फिर नहीं सकते हैं. बहुत मुश्किलों से वे एक किलोमीटर का रास्ता तय कर वैक्सीन लेने टीकाकरण केंद्र पहुंचे. इनसे बात करने पर उन्होंने कहा कि मेरा आने का मकसद केवल वैक्सीन लेना ही नहीं है, बल्कि लोगों को भय मुक्त वैक्सीन लेने की अपील भी करना है. मैं सीधे चल नहीं सकता फिर भी टीकाकरण केंद्र तक आकर टीका लिया हूं मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं जो स्वास्थ्य होकर भी कोविड का टीका लेने, केंद्र तक नहीं आ रहे हैं. मेरी उनसे अनुरोध है कि टीकाकरण केंद्र पहुंचकर टीका अवश्य लीजिए.
बाबूराम हेम्ब्रम के इस जज्बा को देखकर काठीकुंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी रजनीश कुमार ने स्वयं उन्हें ले जाकर टीकाकरण कराया एवं उन्हें बाहर साइकिल तक छोड़ने गए. उन्होंने उनकी इस कार्य की सराहना की और कहा कि हमें इनसे सीखने की आवश्यकता है. सीखने के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होती. उन्होंने कहा कि बहुत से लोग टीका लेने आये या लाये गए. लेकिन इनके जैसा कोई नहीं दिखा. बाबूराम हेम्ब्रम टीका लेकर एक मिसाल साबित करते हुए समाज को जागरूक करने का कार्य किया है.


