रांची: विधायक सह पूर्व मंत्री सरयू राय ने पथ निर्माण घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की भूमिका की जांच भी जरूरी बताई. उन्होंने एक जनवरी 2014 से पथ निर्माण विभाग में हुई अनियमितता की जांच की मांग उठाई है. साथ ही, गहन जांच के लिये एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की.
राय ने कहा कि नवगठित झारखंड सरकार ने पथ निर्माण विभाग की अनियमितताओं एवं निविदा घोटालों पर कार्रवाई आरंभ कर दिया है. पथ निर्माण के अभियंता प्रमुख एवं कतिपय अन्य अभियंताओं को निलंबित किया गया है. बड़े पैमाने पर निविदाओं को रद्द कर दिया गया है. यह कारवाई स्वागत योग्य है, परंतु इतना ही पर्याप्त नहीं है. इस अवधि में पथ निर्माण विभाग के प्रभारी मंत्री, जो उस समय मुख्यमंत्री थे तथा सचिव जो स्वयं मुख्य सचिव थीं, की भूमिका की जांच भी जरूरी है.
उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार ये दोनों ही पथ निर्माण विभाग में घोटालों और अनियमितताओं की संस्कृति आरंभ करने, नियम विरूद्ध आदेश देने तथा उन आदेशों को क्रियान्वित करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों एवं अभियंताओं पर दबाव डालने के लिए जिम्मेदार हैं. यह भी सूचना है कि पथ निर्माण विभाग में हुई अनियमितताओं की जांच 1 जनवरी, 2016 से करने का आदेश हुआ है. वस्तुतः यह जांच 1 जनवरी, 2014 से होनी चाहिए, क्योंकि पथ निर्माण विभाग से ऐसी अनियमितताओं का दौर उस समय से ही आरंभ हुआ था.
इसके साथ ही जांच का दायरा भवन निर्माण एवं ऊर्जा विभाग तक बढ़ायी जानी चाहिए।.
पथ निर्माण विभाग को अनियमितताओं के बारे में मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को 11 मार्च, 2018 को पत्र लिखा था. इसके पूर्व 24 अगस्त, 2017 को भी पीत पत्र के द्वारा उन्हें सूचित किया था. पथ निर्माण विभाग की सचिव को इस बारे में 28 मार्च, 2018 को सप्रमाण सूचित किया था.
26 जुलाई, 2018 को भी पथ निर्माण विभाग की कार्य संस्कृति के बारे में सचिव को पत्र भेजा था. इसके अतिरिक्त गुवा-सलाई रोड की अनियमितताओं के बारे में और एनजीटी द्वारा इस बारे में तत्कालीन पथ निर्माण सचिव एवं मुख्य सचिव को कार्रवाई के लिए भेजे गये आदेश का भी जिक्र किया था. परंतु पत्रों में अंकित बिंदुओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके कारण अनियमितताओं का दायरा बढ़ता गया. निविदाओं के निष्पादन में अनियमितता को सांस्थिक रूप दे दिया गया.

