नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (8 मई) को कोरोनो वायरस लॉकडाउन के मद्देनजर फीस में छूट की मांग करने वाले निजी कॉलेजों के छात्रों की याचिका का निपटारा किया, जिससे कई अभिभावकों की नौकरी चली गई और वेतन में कटौती हुई.
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता से पूछा कि अगर फीस लेने में असफल रहे तो कॉलेज कैसे चलेंगे. कोर्ट अपने कर्मचारियों को वेतन कहां से देगा, कोर्ट ने पूछा.
याचिकाकर्ता ने अदालत से कॉलेज प्रशासन को छात्रों को कुछ छूट देने की अनुमति देने का आदेश देने का अनुरोध किया लेकिन शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया कि उन्हें संबंधित विश्वविद्यालय से बात करनी चाहिए.
छात्रों की दलील इस तथ्य पर आधारित थी कि COVID-19 लॉकडाउन के कारण उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है. कंपनियां अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर रही हैं और लाखों लोग पहले ही अपनी नौकरी खो चुके हैं. केंद्र और राज्य सरकारों ने पहले ही निजी स्कूलों से बच्चों की फीस नहीं बढ़ाने की अपील की है.
विशेष रूप से, कई माता-पिता ने लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी खो दी है. ऐसे में वे निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले अपने बच्चों की मोटी फीस नहीं दे पा रहे हैं. याचिका में इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित करने की मांग की गई थी लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया.

