रिपोर्टर – ज्योत्सना
बाहरी लोगों के प्रवेश पर निषेधाज्ञा जारी करने वाले गांवों में अब मुम्बई के बाहरी लोग आकर ग्रामीणों के साथ ताल से ताल मिला रहे हैं. मुम्बई महानगर से फ़िल्म निर्माण की पूरी 120 लोगों की टीम आकर लगातार एक हफ्ते से पत्थलगड़ी इलाकों में बायोपिक फ़िल्म निर्माण का काम कर रहे हैं.
कई सुपरहिट फिल्में जैसे घायल, दामिनी, अंदाज अपना अपना, दबंग-1, दबंग-2 , डायरेक्टर राजन खोसा सभी सरल सहज अंदाज में गांव गांव घूमकर भगवान बिरसा मुंडा आधारित बायोपिक बनाने में जुटे हैं. बिरसा मुंडा के नाम पर सभी बाहरी लोगों के साथ स्थानीय मुण्डा आदिवासी अपनी परंपरा और संस्कृति को जीवन्त बनाने में लगे हैं. बड़े लेखक, बड़े कैमरे के साथ मुण्डा आदिवासी मधुरता के साथ घुल मिल गए हैं.
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बिरसा मुण्डा को बड़े स्क्रीन पर जीवंत बनाने का दायित्व जब जंगल-जमीन से जुड़े ठेठ आदिवासियों को मिल जाए तो वही पत्थलगड़ी गांवों के विद्रोही तेवर के आदिवासी बड़े प्यार और सहजता के साथ एक बार फिल्मी स्टाइल में ही सही, भगवान बिरसा मुंडा की तरह निडर और आदिवासी मूल्यों के साथ स्वछन्द होकर पर्दे पर जीना चाहते हैं.
बिरसा के उसूलों और कर्मों को हू-ब-हू पर्दे पर उतारने की ललक इन मुण्डा आदिवासियों में साफ दिखाई दे रही है, और हो भी क्यों न, जब हिंदी फिल्मों में एक से एक सुपरहिट फिल्में देनेवाले स्क्रिप्ट राइटर दिलीप शुक्ला मुण्डा आदिवासियों के मन और दिल की बात को गीत संगीत और नृत्य के माध्यम से पर्दे पर उतारेंगे.
मुम्बई की 120 लोगों की टीम जब खूंटी के जंगल पहाड़ों वाले गांव में पहुंची तो मुण्डा आदिवासियों ने वर्तमान पत्थलगड़ी के पत्थल में उकेरे गए शब्दों को भूलकर बेहद सरल सहज अंदाज में अतिथियों का सत्कार किया. दिलीप शुक्ला ने बताया कि यहां आकर हमें न किसी के विरोध का सामना करना पड़ा और न ही सुरक्षा को लेकर आशंकित हुए. बड़े सामान्य सहज ढंग से मुण्डा आदिवासी बिरसा मुण्डा की बायोपिक फ़िल्म के लिए नाच गान और एक्टिंग भी कर रहे हैं.
झारखंड सरकार भी फ़िल्म निर्माण के लिए सपोर्ट कर रही है. भगवान बिरसा मुंडा की बायोपिक फ़िल्म बन रही है लेकिन बिरसा मुंडा को लेकर बड़ी फिल्म बनाने की भी योजना है जिसे अन्य राज्यों के लोग भी जाने और बिरसा की फ़िल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर की फ़िल्म होगी चूंकि आदिवासी समाज के जो मूल्य हैं, जंगल, जड़, जमीन से यहां के लोगों के जुड़ाव का प्रचार प्रसार बाहर के लोगों तक पहुंचे. बिरसा के अदम्य साहस, अंग्रजों से लोहा लेने की कला और लोगों को एकजुट करने की शक्ति फ़िल्म के माध्यम से बाहर तक पहुंचनी चाहिए.

