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‘एम’ फैक्टर में छिपा एनडीए की जीत का राज

by bnnbharat.com
November 11, 2020
in समाचार
70 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों को अनाज की होम डिलीवरी करेगी नीतीश सरकार
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पटना: तमाम एग्जिट पोल को पछाड़ते हुए नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने जीत दर्ज की. केवल जीत ही दर्ज नहीं की बल्कि, बहुमत के आंकड़े को पार भी कर लिया. बिहार में एक बार फिर एनडीए की अगुवाई में सरकार बनने जा रही है. वहीं, युवा नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व  में लड़ा महागठबंधन को एक बार फिर मात खानी पड़ गयी. महागठबंधन जादुई आंकड़ा पाने से चूक गया. एनडीए की जीत का हीरो इस बार भाजपा रही है, जिसने जदयू से कहीं ज्यादा सीट हासिल की. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में चले कैंपेन के दमपर भाजपा ऐतिहासिक नंबर ला पाई है. इससे एक बात तो साफ हो गयी है कि बिहार में भाजपा के प्रति लोगों का विश्वादस बढ़ा है. बिहार में इस बार एनडीए की इस अप्रत्याशित जीत का राज तीन ‘एम’ फैक्ट रहा, जिनके दम पर फिर सरकार बनती दिख रही है.

पहला फैक्टर: एम से मोदी

तमाम सर्वे में इस बार दिख रहा था कि महागठबंधन एकतरफा जीत हासिल कर लेगा. वहीं, नीतीश कुमार के प्रति जनता में गुस्सा था. लेकिन जब बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की ओर से मोर्चा संभाला तो हवा का रुख बदलना शुरू हुआ. पीएम मोदी ने करीब एक दर्जन सभाएं की, कई रैलियों में वो नीतीश कुमार के साथ भी नजर आए. पीएम ने लगातार नीतीश की तारीफ की, लोगों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें नीतीश सरकार की जरूरत है.

इसके अलावा केंद्र की योजनाओं का गुणगान हो, राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विपक्ष पर वार करना हो या फिर राजद के जंगलराज का जिक्र कर तेजस्वी पर निशाना साधना हो, पीएम मोदी ने अकेले दम पर एनडीए के प्रचार को आगे बढ़ाया. जिसने हार और जीत का अंतर तय कर दिया, नतीजों ने भी दिखाया कि जहां जदयू को सीटों में घाटा हुआ वहां पर बीजेपी की बढ़त ने एनडीए को बहुमत तक पहुंचा दिया.

दूसरा फैक्टर: एम से महिलाएं

एनडीए की जीत का एक अहम फैक्टर बिहार की महिला वोटर रहीं. बिहार में महिला वोटरों को नीतीश कुमार का पक्का मतदाता माना जाता रहा है, जो हर बार साइलेंट तरीके से नीतीश के पक्ष में वोट करता है. यही नतीजा इस बार के चुनाव में भी दिख रहा है. इसके अलावा महिलाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कई योजनाओं पर विश्वास 2019 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा और अब फिर इसका असर पहुंचा है.

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना, शौचालयों का निर्माण, पक्का घर, मुफ्त राशन, महिलाओं को आर्थिक मदद जैसी कई ऐसी योजनाएं हैं जिनका सीधा लाभ महिलाओं को होता है. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा की गई शराबबंदी के पक्ष में भी बिहार की महिलाएं बड़ी संख्या में नजर आती हैं. ऐसे में फिर एक बार एनडीए की जीत में 50 फीसदी आबादी निर्णायक भूमिका निभाते नजर आए हैं.

खुद पीएम मोदी ने बिहार चुनाव के नतीजों के बाद महिला वोटरों को खास तौर पर धन्यवाद किया. पीएम मोदी ने लिखा, ‘बिहार की बहनों-बेटियों ने इस बार रिकॉर्ड संख्या में वोटिंग कर दिखा दिया है कि आत्मनिर्भर बिहार में उनकी भूमिका कितनी बड़ी है. हमें संतोष है कि बीते वर्षों में बिहार की मातृशक्ति को नया आत्मविश्वास देने का NDA को अवसर मिला, यह आत्मविश्वास बिहार को आगे बढ़ाने में हमें शक्ति देगा.’

तीसरा फैक्टर: एम से मुस्लिम

बिहार में मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से राजद के साथ जुड़ता रहा है और यही कारण है कि राजद का M+Y समीकरण निर्णायक माना जाता रहा है. राज्य में करीब 17 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं, जो हार जीत का अंतर पैदा कर सकते हैं. लेकिन इस बार यही वोटर अलग-अलग हिस्सों में बंटते हुए नजर आए, जिसका फायदा एनडीए को हो गया.

इस बार मुस्लिम मतदाताओं के सामने कई तरह के ऑप्शन थे, राजद की अगुवाई में महागठबंधन चुनाव लड़ रहा था तो वहीं बिहार में AIMIM ने भी बड़ी जीत हासिल की. इसके अलावा बसपा जैसी पार्टियां भी अपने क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों को लुभा पाईं. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM इस बार चुनाव में पांच सीटों पर जीत हासिल कर पाई, जिसे राजद का बड़ा वोट माना जा रहा है. और इन्हीं सीटों ने महागठबंधन की जीत में रोड़ा अटका दिया.

गौरतलब है कि बिहार में इस बार NDA को 125 सीट मिली हैं, जिनमें से बीजेपी के खाते में 74, जदयू के खाते में 43, विकासशील इंसान पार्टी के खाते में 4 और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के खाते में 4 सीटें गई हैं. दूसरी ओर महागठबंधन में राजद को कुल 75, कांग्रेस को 19 और लेफ्ट पार्टियों को मिलाकर 16 सीटें मिल पाई हैं.

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