रांची: प्रदेश कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में 26 जनवरी को संविधान की सिद्धांतों और भाजपा के वर्तमान नीतियों से किस प्रकार संविधान को खतरा है विषय पर विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया.
प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने संबोधित करते हुए कहा कि संविधान हमारे देश का सबसे बड़ा कानून है, जिसकी प्रस्तावना का हमने संकल्प लिया. संविधान की रक्षा करने का 1779 में फ्रांस की क्रांति आई थी उस समय जो विचार आया था उसका समावेश है. संविधान की प्रस्तावना में न्याय, अभिव्यक्ति, समानता की आजादी दी गई है. 15 अगस्त 1947 के पहले छुआछूत की बिमारी थी, संविधान ने अनुच्छेद 17 के माध्यम से अस्पृस्यता समाप्त की. अंग्रेजों के शासन में समानता नहीं दी, हमें समानता दी गई. हम सबको उपर उठाना होगा तभी हम समान हो सकते हैं. आरक्षण में विशेष व्यवस्था की गई ताकि सैकड़ों, हजारों वर्षों से जो पिछड़े हुए थे, उन्हें आगे आने की व्यवस्था की गई. आरक्षण का लाभ मौलिक अधिकारों के रूप में दिया गया. अनुच्छेद 370 ए में सभी भाषाओं को संरक्षण दिया गया और मातृ भाषा में शिक्षा की व्यवस्था दी गई ताकि हमारी भाषा बची रही. संविधान के अनुच्छेद 51 ए में हमें कर्तव्यों को भी बताया गया, देश और समाज को अगर समझना है तो संविधान को पढ़ना जरूरी है. अनेकता में एकता को परिभाषित करता है हमारा संविधान.
सर्वप्रथम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव, विचार-गोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ गुलफाम मुजीबि, वरीष्ठ कांग्रेस नेता अनादि ब्रह्म, प्रो वीपी शरण, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के कोषाध्यक्ष गोपाल साहु, प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने संविधान सभा के महान विभूतियों डॉ भीम राव अम्बेड़कर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण किया एवं दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने विधिवत उद्घाटन किया.

