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प्रभारी आरपीएन सिंह की शिकायत करने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जल्द जाएंगे दिल्ली

by bnnbharat.com
January 2, 2021
in समाचार
गठबंधन सरकार जो कहती है, वह करती है, यह सिद्ध हुआ: आरपीएन सिंह
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संगठन में सामंजस्य की जगह सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप व अशिष्टतापूर्ण व्यवहार का लगता रहा है आरोप

रांची: झारखंड कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह के कामकाज के तरीके, अशिष्टतापूर्ण व्यवहार और उनके कार्यकाल में करीब साढ़े तीन वर्षों तक कमेटी का गठन नहीं हो पाने से प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्त्ताओं में खासी नाराजगी है. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक शिष्टमंडल जल्द ही दिल्ली जाकर नेतृत्व को सारी वस्तु स्थिति से अवगत करायेगा.

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी सरीखे वरिष्ठ नेताओं ने प्रभारी आरपीएन सिंह के व्यवहार और उनकी कार्य गतिविधि के खिलाफ खुलकर नाराजगी जतायी है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आरपीएन सिंह की सोच क्या है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि वे गठबंधन सरकार की पहली वर्षगांठ के मौके पर चेहरा चमकाने रांची आ जाते है,लेकिन उससे कुछ घंटे पहले पहले ही पार्टी स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेना उचित नहीं समझते हैं. इसी तरह की बात पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी भी कहते है.

उनका कहना है कि आरपीएन सिंह के कारण ही झारखंड में पार्टी की सांगठनिक स्वरुप गठित नहीं हुई है. पार्टी के कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं का भी कहना है कि आरपीएन सिंह ने जानबूझकर प्रभारी रहने के दौरान करीब साढ़े तीन वर्षों तक राज्य में कमेटी का गठन नहीं होने दिया. इससे पहले भी पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के कार्यकाल में ही कमेटी का गठन नहीं हो पाया और अब प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव को भी कमेटी गठन करने नहीं दिया जा रहा है.

प्रभारी ने अपने मन मुताबिक सिर्फ पांच ऐसे प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षों का मनोनयन करा दिया गया है, जिन्हें संगठन चलाने का कुछ खास अनुभव नहीं रहा है. कुछ कार्यकारी अध्यक्षों पर तो पहले से ही पार्टी संगठन के खिलाफ काम करने के आरोप के गंभीर आरोप रहे है. इन सबकी अनदेखी कर ऐसे नेताओं को बड़ी जिम्मेवारी देने से संगठन के वरिष्ठ नेता उन्हें पचा नहीं पा रहे है.

प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह पर संगठन के वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्त्ताओं पर अशिष्ट व्यवहार करने का भी आरोप लगता रहा है. कई उम्रदराज नेताओं के खिलाफ उनपर असंसदीय भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगता रहा है.

प्रभारी से नाराज संगठन के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि 20 वर्षों में यह पहली बार हुआ कि आरपीएन सिंह द्वारा प्रदेश अध्यक्ष को दरकिनार संठन का कामकाज अपनी मनमर्जी से चलाया जा रहा है. उनपर सिर्फ दो-तीन नेताओं से घिरे रहने के साथ ही प्रखंड अध्यक्षों को भी हटाने और बनाने में भी हस्तक्षेप का आरोप लगता रहा है. वहीं पिछले दिनों कोरोना संक्रमण में भी संगठनात्मक विस्तार पर चर्चा के लिए रांची आये सह प्रभारी उमंग सिंघार को भी आरपीएन सिंह ने ही अपने प्रभाव से वापस बुला लिया और उनके साथ अपमान जनक सलूक किया.

नाराज नेताओं का कहना है कि संगठन प्रभारी का काम संगठन में सामंजस्य बनाने का रहा है, लेकिन आरपीएन सिंह सरकार के कामकाज में भी सीधा हस्तक्षेप कर रहे है, जिसके कारण पार्टी कोटे के मंत्री भी परेशान है और खुद को पंगु समझ रहे है. वहीं प्रभारी पर यह भी आरोप लगता रहा है कि जब भी वे झारखंड दौरे आते है, तो इसकी सूचना प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता को भी नहीं दी जाती है.

झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह से नाराज प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनकी शिकायत को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात के लिए पहले ही दिल्ली जाने वाले थे, लेकिन कोरोना संक्रमण को लेकर अनिश्चतता की वजह से अब तक वे दिल्ली नहीं जा सके, लेकिन अब संक्रमण का खतरा कम होने के बाद सभी वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श कर एक साथ दिल्ली जाकर नेतृत्व को सारी वस्तु स्थितियों से अवगत कराया जाएगा.

पार्टी नेतृत्व को यह जानकारी दी जाएगी कि जिस वक्त डॉ0 रामेश्वर उरांव को प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी मिली, उस वक्त तीन-तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत, डॉ. अजय कुमार और प्रदीप बलमुचू समेत कई विधायक संगठन छोड़ कर जा चुके थे, उसके बावजूद प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 रामेश्वर उरांव तथा विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के नेतृत्व में पार्टी ने संगठन को विश्वास में लेकर, कार्यकर्ताओं को संगठित कर विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया और अलग झारखंड राज्य गठन के बाद पहली बार सबसे अधिक सीट हासिल की.

प्रभारी से नाराज कांग्रेस नेता पार्टी नेतृत्व से आग्रह करेंगे कि वे तत्काल प्रभारी से आरपीएन सिंह के सरकार तथा संगठन में अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाये या उन्हें हटा कर किसी दूसरे अनुभवी नेता को जिम्मेवारी सौंपी जाएं.

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