नई दिल्लीः पिछले कई दिनों से जारी महाराष्ट्र की सियासत में जो उथल पुथल मचा रहा उस पर मंगलवार शाम राज्यपाल के एक्शन ने पर्दा गिरा दिया. महाराष्ट्र में जैसे ही राष्ट्रपति शासन लगा तो शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया. राज्यपाल के द्वारा अधिक समय ना दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. मगर, बुधवार को शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी पर फिलहाल यू-टर्न ले लिया.
शिवसेना ने मंगलवार को दाखिल अर्जी पर अभी जल्द सुनवाई की मांग नहीं की है. इसके साथ ही शिवसेना ने अपना रुख बदलते हुए कहा है कि अभी राष्ट्रपति शासन के फैसले को भी वह चुनौती नहीं देगी. शिवसेना के वकील सुनील फर्नांडिस ने कहा कि हम आज शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर नहीं कर रहे हैं.
याचिका कब दायर की जाए, इस पर निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है. राज्यपाल द्वारा मोहलत न दिए जाने की कल की याचिका को भी हम आज मेंशन नहीं कर रहे हैं. इससे पहले खबर थी कि शिवसेना राष्ट्रपति शासन के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक नई याचिका दाखिल करेगी. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ.
शिवसेना की ओर से अभी सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल के द्वारा अधिक समय ना दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है, हालांकि राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ शिवसेना एक और याचिका दायर कर सकती है. शिवसेना ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का विरोध करते हुए कहा है कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उसे दूसरी पार्टियों से समर्थन की चिट्ठी पाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया.
महाराष्ट्र मसले पर सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की तरफ से राष्ट्रपति शासन के खिलाफ भी दूसरी अर्जी नहीं दाखिल की जा सकती है. इसके अलावा शिवसेना की ओर से तत्काल सुनवाई की अपील भी नहीं की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल शिवसेना का पक्ष रखेंगे. शिवसेना की तरफ से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सुनील फर्नांडिस ने कहा, उच्चतम न्यायालय ने रिट याचिका का उल्लेख अदालत के समक्ष बुधवार साढ़े दस बजे करने को कहा है.

