जगदम्बा प्रसाद शुक्ल की रिपोर्ट,
प्रयागराज: शुक्रवार से अधिक मास का प्रारंभ हो रहा है. अधिक मास जिसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होता है. भक्तगण अपने आराध्य की आराधना करने के लिए तीसरे वर्ष तक इस माह का इंतजार करते रहते हैं. पुरुषोत्तम मास शुरू होते ही मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाने संवारने और यज्ञ, हवन, पूजन का कार्य प्रारंभ कर दिया जाता है.
पुरुषोत्तम मास में सबसे अधिक महाकालेश्वर भगवान शिव की पूजा की जाती है. शिव भक्त कांवरिये यहां शिव मंदिरों में महादेव का जलाभिषेक करते हैं वही लोग पैदल या वाहन से काशी विश्वनाथ उज्जैन और सबसे अधिक देवघर झारखंड की यात्रा करते हैं जहां बैजनाथ धाम में स्थापित शिव की पूजा करके अपनी मनोकामना पूरी करते हैं.
कोरोना से भक्तों में छायी मायूसी
लगातार तीन वर्षों की प्रतीक्षा के बाद इस वर्ष फिर पुरुषोत्तम मास आ रहा है लेकिन वैश्विक महामारी को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अधिकतर भक्तों ने इस बार कोरोना के डर से बैद्यनाथ धाम ना जाकर घर पर ही रह कर जलाभिषेक,रुद्राभिषेक या हवन पूजन करके भगवान शिव को प्रसन्न करने का मन बना लिया है. लगातार कई वर्षों से अधिक मास में बैजनाथ धाम की यात्रा करने वाले राधेश्याम केसरवानी, थानेश्वर शुक्ल, चंद्रप्रकाश द्विवेदी आदि ने बताया कि कोरोना के चलते भीड़ से बचने के लिए वे घर पर ही रह कर शिव पूजन हवन आदि करना चाहते हैं, ताकि वैश्विक महामारी से बचा जा सके.
बस मालिक भी असमंजस की स्थिति में
अधिक मास में करमा से दर्जनों बसें बैजनाथ धाम जाती थी जिनसे क्षेत्र के कई गांव के यात्री एक साथ जाकर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते थे. इसके लिए करमा के कुछ लोग बस मालिकों से संपर्क करके बसें मंगा लेते थे जिससे उन्हें भी बचत हो जाती थी और लोगों की यात्रा भी हो जाती थी. बस से यात्रा करवाने वाले करमा के देवराज पटेल ने बताया कि इस बार हर वर्ष यात्रा करने वाले कई लोगों से बातचीत की गई लेकिन अधिकतर लोग वहां जाने के लिए तैयार नहीं है जिससे हम लोग असमंजस की स्थिति में हैं.

