रांची. रांची की महिला उद्यमी शोभा कुमारी कपड़े और लकड़ी के बुरादे से खिलौना बनाने का काम पिछले कुछ वर्षों से कर रही हैं. इस काम के जरिए शोभा कुमारी खुद आत्मनिर्भर बनी है साथ ही बीस से पच्चीस महिलाओं को भी काम से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रही हैं.
रांची की रहने वाली शोभा कुमारी ने खिलौना बनाने के शौक को स्वरोजगार के रूप में तब्दील कर दिया. इसके पीछे उन्होंने जमकर मेहनत भी की. शोभा कुमारी ने खिलौना बनाने के लिए बकायदा राजस्थान और कोलकाता जाकर प्रशिक्षण भी लिया है. जब इस काम में अच्छी कमाई होने लगी तो शोभा कुमारी अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ने लगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फोर लोकल, आत्मनिर्भर भारत और खिलौना निर्माण में उद्यमियों के आगे आने के आह्वान से शोभा कुमारी काफी उत्साहित हैं. इनका कहना है कि पहले लोग विदेशी खिलौनों के प्रति ज्यादा रुझान रखते थे लेकिन जब से प्रधानमंत्री ने लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देने की बात कही है तब से लोग इन हस्त निर्मित खिलौनों की मांग अधिक कर रहे हैं.
शोभा कुमारी के साथ जुड़ी महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं. सेलिना कच्छप , प्रतिभा टोप्पो और निशा मेहता जैसी महिलाओं को दूसरे राज्यों में जाकर खिलौना बनाने का प्रशिक्षण नहीं लेना पड़ा. इन्हें रांची में ही शोभा कुमारी जैसी गुरु मिल गई. इन महिलाओं का कहना है कि हाथों में हुनर आने के साथ ही कमाई भी होने लगी है. जिसका लाभ उन्हें और घरवालों को मिल रहा है.

रांची की बेटी शोभा कुमारी के हाथों से बनने वाले ये खिलौने बिल्कुल सजीव दिखते हैं. हाथों के हुनर से शोभा कुमारी आत्मनिर्भर तो बन रही है. देश के अलावा अमेरिका और नीदरलैंड जैसे कई अन्य देशों से खिलौनों की डिमांड ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई है.

