नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि ‘स्कूली शिक्षा और कौशल विकास एक साथ होने चाहिए.’ आज हुबली में देशपांडे फाउंडेशन के आवासीय कौशल केंद्र के उद्घाटन के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में कौशल विकास पर अतीत में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि स्कूली छात्रों के लिए कौशल विकास को अनिवार्य बनाए जाने के लिए शिक्षा नीति की समीक्षा किये जाने का आह्वान किया. कुशल मानव संसाधन का माहौल बनाए जाने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम के साथ व्यावसायिक शिक्षा को जरूरी बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कौशल विकास और शिक्षा के स्तर दोनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्कूली छात्रों में सभी क्षेत्रों के अनुरूप कौशल विकसित करने के जिम्मेदारी केन्द्र और राज्य सरकारों की है. कृषि को व्यवहारिक और लाभदायक बनाने की पहल के तहत ग्रामीण भारत और कृषि की जरूरतों के अनुरूप लोगों में कौशल विकास का काम होना चाहिए. उन्होंने वर्षा जल संचयन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि कर्ज माफी और मुफ्त दी जाने वाली सुविधाएं किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हैं. इनके लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है. यदि आर्थिक सुधारों की मौजूदा गति जारी रहती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी से उबर कर रफ्तार पकड़ लेगी. उन्होंने उद्योग और कॉर्पोरेट जगत से अपील की कि वे अनुसंधान और विकास कार्यों को मजबूती देने और युवाओं को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ हाथ मिलाएं.

