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बांस की लकड़ी में नशीली दवा बांधकर बांग्लादेश भेज रहे तस्कर

by bnnbharat.com
June 11, 2020
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बांस की लकड़ी में नशीली दवा बांधकर बांग्लादेश भेज रहे तस्कर

बांस की लकड़ी में नशीली दवा बांधकर बांग्लादेश भेज रहे तस्कर

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नई​ दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ते कोरोना (Corona) संक्रमण के मामले को देखते हुए एक ओर जहां सीमा पर तैनात जवान कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं वहीं इसी बात का फायदा अब तस्कर उठाने की कोशिश में लगे हुए हैं. भारत-बांग्लादेश कि 4000 किलोमीटर से ज्यादा की सीमा पर तस्कर किसी भी तरह नशीली दवा बांग्लादेश भेज रहे हैं. खबर है कि लॉकडाउन के दौरान भारत-बांग्लादेश सीमा पर फैंसीड्रिल कफ सिरप दवा नशे के तस्करों का नया हथियार बन गई है. लॉकडाउन के दौरान सिर्फ ढाई महीने में ही भारत-बंग्लादेश सीमा पर करीब सवा करोड़ रुपये की फैंसी ड्रिल पकड़ी जा चुकी है.

भारत बांग्लादेश सीमा के बीच नदियों में अब पानी का बहाव तेज होता जा रहा है तो तस्कर पानी बहाव से बांस लकड़ी के बीच में फैंसी ड्रिल दवा बांधकर भारत से बांग्लादेश से भेजने की कोशिश करते हैं. ऐसी ही एक खेप को कुछ दिनों पहले सीमा पर पकड़ा गया है. इसी तरह के एक अन्य मामले में गाड़ियों के नीचे बोतलों के कंसाइनमेंट को छुपा कर सीमा पार कराने की कोशिश की गई थी. यही नहीं मोटरसाइकिल की पेट्रोल की टंकी का इस्तेमाल भी तस्कर अपना सामान भेजने के लिए कर रहे हैं. इतना ही नहीं सब्जियों को काटकर उनके बीच दवा को छुपाकर इसे बराबर ले जाने की कोशिश की जाती रही हैं. बताया जाता है कि तस्कर सैकड़ों लीटर बोतल अपने शरीर में बांध कर कटीले तारों को पार करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं.

बीएसएफ के डीआईजी एस एस गुलेरिया ने बताया कि भारत और बांग्लादेश की सीमा के बीच नो मेंस लैंड पड़ती है और इन इलाकों में कई ऐसे गांव हैं जहां से स्थानीय नागरिक अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए अंदरूनी हिस्सों में आते हैं और तस्कर इन स्थानीय नागरिकों की ऐसे ही मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें तस्करी का हथियार बनाते हैं और उनके साथ बोतल बंगलादेश भेजने की कोशिश करते हैं.

तस्करी के यह नए हथकंडे सिर्फ ढाई महीने में ही अपनाए गए हैं. दरअसल बांग्लादेश में शराब पर पाबंदी है इसीलिए फैंसी ड्रिल दवा की तस्करी भारत से बांग्लादेश में की जाती है. इसी वजह से बांग्लादेश में यह दवा प्रतिबंधित है जबकि भारत में सिर्फ इसे बतौर दवा इस्तेमाल करने की इजाजत है. हर साल इस दवा के तस्करी की तादात बढ़ती ही जा रही है. 2018 में करीब दो करोड़, 2019 में करीब तीन करोड़ और इस साल अब तक ही करीब दो करोड़ मूल्य की फैंसी ड्रिल दवा भारत-बांग्लादेश सीमा पर जब्त की जा चुकी है.

गुलेरिया के मुताबिक फैंसी ड्रिल के अलावा अन्य सामानों की भी तस्करी बड़े पैमाने पर भारत बांग्लादेश की सीमा पर होती है. भारत-बांग्लादेश के बीच करीब 4095 किलोमीटर की सीमा है जो कि कई विषम रास्तों से गुजरती है. ऐसे में तस्कर सीमा के भौगोलिक स्थिति और कोरोनावायरस संक्रमण के हालात का फायदा उठाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल के चारों रीजन कोलकाता मालदा कृष्णानगर और बहरामपुर में फैंसी ड्रिल तस्करी के मामले सामने आए हैं.ऐसे में आनेवाले दिनों में तस्करों के इन नए तरीकों से निपटना और सीमा पर तस्करी रोकना बीएसएफ के लिए बड़ी चुनौती होगी.

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