जम्मूः जम्मू कश्मीर के ऊधमपुर में सेना के नॉर्दन कमांड हेडक्वार्टर में तैनात इनफेन्ट्री रेजीमेंट के एक सैनिक को कथित तौर पर पाकिस्तान में क्लासिफाइड डाटा को शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार हवलदार पंजाब का रहने वाला है. गिरफ्तारी के बाद जवान से पूछताछ की जा रही है. हवलदार पर आरोप है कि उसने पाकिस्तानी हैंडलर्स को इलेक्ट्रॉनिक रूप में क्लासीफाइड डाटा शेयर किया था. संबंधित सूत्रों ने जानकारी दी है कि मामले की जांच चल रही है.
सूत्रों के मुताबिक जम्मू और कश्मीर में इस डाटा के शेयर किए जाने के बाद सैनिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. वहीं दूसरी ओर बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग (Anantnag) में सुरक्षाबलों और आंतकियों के बीच मुठभेड़ में 2 आतंकवादी मारे गए. जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक, 2.-3 आतंकियों के और छुपे होने की आशंका थी.
कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने बताया कि यह काफी घना जंगल है हालांकि जवानों ने आतंकियों को मार गिराया गया. आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में एक सूचना के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में घेराबंदी की और तलाशी अभियान शुरू करने के बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. जैसे ही सुरक्षाबल उस स्थान पर पहुंचे, आंतकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और मुठभेड़ शुरू हो गई.
इससे पहले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के बडगाम और शोपियां जिलों में एनकाउंटर की अलग-अलग घटनाओं में तीन अज्ञात आतंकी मारे गए थे और एक पुलिस कर्मी शहीद हो गया था. अधिकारियों ने बताया कि आतंकवादियों के छिपे होने के बारे में गुप्त सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके के जानीगाम गांव की घेराबंदी कर तलाश अभियान चलाया था.
उन्होंने बताया था कि तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां एक ने दम तोड़ दिया. इसके अलावा शोपियां जिले के बडीगाम में एक अलग मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था.
गौरतलब है कि इस ऐतिहासिक फैसले पर पूरी दुनिया की नजर थी क्योंकि इस कानून के कारण अब मीडिया संस्थानों की जवाबदेही तय होगी. जानकारों का मानना है कि अब गूगल और फेसबुक पर कटेंट परोसते वक्त लोग सावधानी पूर्वक निवेश करेगें, साथ ही नियामों के साथ कंपनियों के आपसी विवाद को शांत कराने में भी मदद मिलेगी. खास बात ये है कि इस कानून के बाद गूगल अब जो कुछ भी दिखाएगा, उसके लिए उसे भुगतान करना होगा. ऐसे ही फेसबुक जो भी न्यूज के तहत परोसेगा उसे उसका भुगतान करना पड़ेगा. आपको बता दें कि ये कानून साल 2021 के अंत में ऑस्ट्रेलिया में लागू होगा.
बता दें कि इससे पहले फेसबुक को ऑस्ट्रेलियन सरकार के साथ समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. फेसबुक ने अपने पेज पर न्यूज पब्लिश करने से लेकर भूकंप-बाढ़ जैसे आपातकालीन जानकारी शेयर करने पर भी रोक लगा दी थी. फेसबुक की इन हरकतों के खिलाफ ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने सख्ती दिखाई थी, जिसके बाद फेसबुक बैकफुट पर आया और उसने सरकार के समझौता कर लिया था. फेसबुक ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया सरकार के साथ एक समझौते पर सहमत हो गये हैं, अब बैन हटा लिया गया है. हमने ऐसे फ्रेमवर्क का समर्थन करने का फैसला किया है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पब्लिशर्स के बीच इनोवेशन और सहयोग को बढ़ाता हो.
तो वहीं सरकार ने कहा कि News Media and Digital Platforms Mandatory Bargaining Code नामक कानून ये सुनिश्चित करेगा कि सामाचार से जुङे व्यवसाय ऑस्ट्रेलिया में सार्वजनिक हित पत्रकारिता को बनाए रखने में मदद सके.

