रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव व प्रवक्ता सुप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि भारत के उच्चतम न्यायालय ने झारखंड राज्य के हेमन्त सोरेन सरकार के अधिकारों को चुनौती देने वाले एक याचिका को खारिज कर एक ऐतिहासिक फैसला देने का काम किया गया है, जिसमें झारखंड के प्रभारी पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को जायज ठहराया गया है.
उन्होंने कहा कि झारखंड की एक विशेष दल जो यह नही चाहती कि झारखंड में मूलवासी अदिवासियों की प्रखर आवाज बन कर उभरे. हेमन्त सोरेन की सरकार के द्वारा राज्य हित में जो निर्णय लिये जा रहे हैं, उसे बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं. वो यह नहीं पचा पा रहे हैं कि झारखंड में मूलवासी आदिवासी अब अपनी सरकार अपनी मर्जी से चलाएं। राज्य में किस पदाधिकारी को किस काम की जिम्मेवारी दि जाय एवं कीनकी उपयोगिता है, उसका सम्पूर्ण लाभ लिया जाय. वर्तमान में पदस्थापित राज्य के प्रभारी पुलिस महानिदेशक एक दक्ष, ईमानदार एवं सक्षम पुलिस कप्तान के रूप में कई बार अपनी योग्यता को स्थापित कर चुके हैं, चाहे वो राज्य सेवा में रहें हों या केन्द्रीय सेवा में अपना योगदान दिये हों.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के हर प्रसाशनिक अधिकारी जनता के प्रति उत्तरदायी हैं, वो किसी भी व्यक्ति या व्यक्ति समूह के प्रति उत्तरदायी नहीं होते. उच्चतम न्यायालय का आज का फैसला मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के फैसले पर निर्णायक मुहर भी लगाता है.

