राँची: मुख्यमंत्री ने कहा है कोविड-19 से उत्पन्न अफरा तफरी के बीच दूसरे राज्यों से श्रमिक बन्धुओं को वापस लाने की चुनौती स्वीकार की गई . इससे भी बड़ी चुनौती इन श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना था. ग्रामीण क्षेत्रों में तो मनरेगा के तहत् लाखों की तादात में श्रमिक बन्धुओं को रोजगार मिला. समस्या शहरी क्षेत्र के श्रमिकों के लिए थी, इसी को मद्देनजर रखते हुए मुख्यमंत्री श्रमिक (शहरी रोजगार मंजूरी फार कामगार) योजना बनायी गई. आज हर्ष की बात है कि इस योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने यह बातें शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन के सभागार में योजना का शुभारम्भ करते हुए कही. उन्होंने कहा कि आज के ही दिन राज्य के नये प्रतीक चिन्ह का भी लोकार्पण किया गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाॅक डाउन के कारण ही यह पता चल पाया कि लगभग 10 लाख श्रमिक झारखण्ड से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों को जाते हैं. कोरोना प्रबन्धन के क्रम में बाहर जाने वाले श्रमिकों के संख्या की जानकारी मिल पायी. उन्होंने ने कहा कि इस महामारी के दौरान सबसे अधिक श्रमिक भाई ही पिसे गये. ट्रेन, बस और हवाई जहाज से श्रमिक बन्धुओं की वापसी कराई गई. झारखण्ड ही ऐसा पहला राज्य है जिसने श्रमिको की वापसी के लिए केन्द्र से अनुमति मांगी . इस लाॅक डाउन के दौरान पूरे राज्य में दाल-भात योजना, दीदी किचेन और महिला समूहों के जरिये किसी को भूखे नहीं रहने दिया गया. इसी संवेदनशीलता से आज राज्य में इस संक्रमण आपदा में कोई भूखा नहीं मरा . यह बहुत बड़ी चुनौती थी. यह सरकार लगातार गरीबों और श्रमिकों के लिए चिन्तित रही है.
श्रमिकों के वापसी के बाद संक्रमण से लड़ने की व्यवस्था करना हमारा नैतिक कर्तब्य रही है. पहीले राज्य में कोई टेस्ंिटग लैब नहीं थी लेकिन आज सभी चैबीस जिलों में टेस्टिंग का कार्य चल रहा है. प्रतिदिन दस हजार से अधिक कोविड-19 की टेस्टिंग चल रही है. इस संक्रमण में रोजगार का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह मरने के सामान था, इसलिए हमलोगों ने सरकार के स्तर पर समय समय पर योजनायें बनाई. ग्रामीण क्षेत्रों के बाद अब शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों के समक्ष कार्यो का अभाव देखते हुए मुख्यमंत्री श्रमिक योजना का शुभारम्भ किया गया. पाँच श्रमिक बन्धुओं को सांकेतिक रूप से जाॅब कार्ड भी दिया गया.
शहरी जनसंख्या है उसमें से लगभग 31 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं, उन्ही को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य है. लगभग पाँच लाख लोग लाभान्वित होगें. आवेदन देने के पन्द्रह दिनों के बाद में शहरी क्षेत्र में रोजगार दिया जायेगा. इस कार्य के तहत् साफ सफाई हरियाली और विकास के कार्य में श्रमिक संलग्न होंगे. देरी होने पा बेरोजगारी भत्ता भी दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि दीदी किचेन योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के लिए चिन्हित कार्यो को इमानदारी से करते हुए शहरों कोे फिर से हरियाल कीओर ले जाये. प्राकृतिक ताने बाने के साथ इस राज्य को आगे बढ़ाने का कार्य करें. इससे पहले नगर विकास एव आावास विभाग के सचिव श्री विनय कुमार चैबे ने मुख्यमंत्री श्रमिक योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी . उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में जितने बेरोजगार है उन्हें 100 दिन का रोजगार गारंटी दिया जायेगा. नगर विकास के साथ साथ अन्य विभागों के कार्यो में भी रोजगार दिया जायेगा. इसके लिए क्रिटीकल फंड की व्यवस्था करायी गई है.

