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जेईई व नीट परीक्षा को स्थगित करने को लेकर स्पीक अप स्टूडेंट सेफ्टी कैम्पेन

by bnnbharat.com
August 28, 2020
in समाचार
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रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक कमार दूबे,लाल किशोर नाथ शाहदेव, डा राजेश गुप्ता छोटू ने कोरोना संक्रमणकाल में जेईई और नीट परीक्षा के आयोजन के खिलाफ आज पार्टी द्वारा आयोजित स्पीक अप स्टूडेंट सेफ्टी कैम्पेन में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेते हुए सोशल मीडिया में अपना वीडियो अपलोड किया.फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्यूटर, इंस्टाग्राम के माध्यम से कांग्रेस प्रवक्ताओं ने वीडियो अपलोड कर जेइई एवं नीट की परीक्षा पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना संक्रमणकाल में पार्टी देश के होनहार विद्यार्थियों के साथ खड़ी है और उनकी सुरक्षा के लिए लगातार आवाज उठा रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जेईई और नीट की परीक्षा स्थगित करने के अनुरोध पर विचार करें.

आलोक कुमार दूबे,किशोर शाहदेव,राजेश गुप्ता ने कहा कि 26 अगस्त को देश में एक  दिन में सर्वाधिक 75 हजार कोरोना संक्रमण के केस सामने आये है,ऐसे छात्र-छात्राओं का परीक्षा के लिए बाहर जाना खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि अधिकतर राज्यों की तरह झारखंड में भी सार्वजनिक परिवहन पर अभी भी रोक है, वहीं पूरे राज्य में सिर्फ पांच परीक्षा केंद्र बनाये गये है,ऐसे में परीक्षा वाले शहर तक यात्रा करने के लिए निजी वाहनों का ही सहारा है.

यह विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए अतिरिक्त बोझ होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों की भांति झारखंड में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आवासीय होटल भी बंद है, विद्यार्थियों और अभिभावकों को विश्राम स्थल भी उपलब्ध नहीं हो सकेगा. झारखण्ड एक गरीब प्रदेश है और सुदूर ग्रामीण इलाकों से सैंकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर बच्चों को परीक्षा स्थल तक पहुंचना साधारण बात नहीं है.

खासकर छात्राओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा इतनी छोटी सी बात केन्द्र की सरकार को क्यों नहीँ समझ में आती है.एक साथ पचास लाख से ज्यादा लोगों का आवागमन होगा ऐसे में संक्रमण का खतरा ज्यादा होगा,परीक्षाओं का लिया जाना कहीं से भी व्यावहारिक नहीं होगा.

प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे लाल किशोर नाथ शाहदेव एवं डा राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए बाध्य करना उचित है, कोरोना के अलावा असम और बिहार जैसे बाढ़ प्रभावित राज्यों के विद्याथ्रियों के लिए एक अतिरिक्त नुकसान है.

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