रांची. कोरोना पॉजिटिव झारखंड मुक्ति मोर्चा, जेएमएम अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन मंगलवार को सड़क मार्ग से बोकारो रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में जोड़े गये विशेष बोगी में सवार होकर रात 7.40मिनट पर दिल्ली के लिए रवाना हुए. इस मौके पर शिबू सोरेन के पुत्र सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उन्हें स्टेशन पर छोड़ने के लिए पहुंचे थे.
तीन दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद दो दिनों तक शिबू सोरेन का होम आइसोलेशन में ही इलाज चला, लेकिन सांस लेने में थोड़ी परेशानी और उनकी उम्र को देखते हुए रांची के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से चिकित्सकों की टीम ने विचार-विमर्श के बाद उन्हें दिल्ली के निकट गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया. प्रारंभ में यह तय हुआ कि उन्हें एयर एंबुलेंस से मेदांता गुरुग्राम ले जाया जाएगा, लेकिन बाद में चिकित्सकों ने बताया कि ट्रेन से भी उन्हें दिल्ली ले जाने में कोई कठिनाई नहीं है, जिसके बाद तत्काल प्रशासनिक महकमा सक्रिय हुआ और रेलवे से बात कर बोकारो में स्पेशल बोगी की व्यवस्था की गयी, जिसे शाम में भुनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में जोड़ा गया.
शिबू सोरेन के दिल्ली जाने के क्रम में सबसे खास बात यह रही कि बिना लाइफ सपोर्ट सिस्टम के खुद चलते हुए बोकारो स्टेशन पहुंचे और ट्रेन पर सवार होकर अपनी सीट पर बैठे. इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए लगातार उनसे बातचीत करते देखे गये और यात्रा के क्रम में आने वाली तमाम छोटी-छोटी जरुरतों को पूरा करने का निर्देश देते दिखे. शिबू सोरेन की देखरेख में मेदांता गुरुग्राम से आये चिकित्सक डॉ. असलम समेत अन्य टीम साथ दिल्ली जा रही है, इस दौरान स्पेशल बोगी में सभी आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण भी उपलब्ध कराया गया है. शिबू सोरेन बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे,जहां से उन्हें सड़क मार्ग से दिल्ली ले जाया जाएगा.
इससे पहले हेमंत सोरेन ने खुद अपनी देखरेख में रांची के मेदांता अस्पताल से अपने पिता शिबू सोरेन को एंबुलेंस में बिठाया और फिर एंबुलेंस के साथ ही मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से होते हुए बोकारो रेलवे स्टेशन पहुंचे. इस मौके पर हेमंत सोरेन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके पिता की तबीयत स्थिर है. उन्होंने बताया कि पिछले सालभर से उनका नियमित चेकअप नहीं हो पा रहा था, इस कारण मेदांता गुरुग्राम ले जाने का निर्णय लिया गया.

