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रामकृष्ण मिशन की स्थापना दिवस पर विशेष: उद्देश्य, सिद्धांत और योगदान

by bnnbharat.com
May 1, 2020
in Uncategorized
रामकृष्ण मिशन की स्थापना दिवस पर विशेष:  उद्देश्य, सिद्धांत और योगदान

रामकृष्ण मिशन की स्थापना दिवस पर विशेष: उद्देश्य, सिद्धांत और योगदान

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रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1 मई सन् 1897 को रामकृष्ण परमहंस के परम् शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने की. इसका मुख्यालय कोलकाता के निकट बेलुड़ में है. इस मिशन की स्थापना के केंद्र में वेदान्त दर्शन का प्रचार-प्रसार है. रामकृष्ण मिशन दूसरों की सेवा और परोपकार को कर्म योग मानता है जो कि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है. वर्तमान में संसथान के अद्द्यक्ष स्वामी स्मरणानन्द हैं.

रामकृष्ण मिशन का ध्येयवाक्य है –

आत्मनो मोक्षार्थं जगद् हिताय च (अपने मोक्ष और संसार के हित के लिये)

रामकृष्ण मिशन को भारत सरकार द्वारा 1996 में डॉ॰ आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार से और 1998 में गाँधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

वेदान्त का प्रचार तो स्वामी जी ने भारत ही नही विदेशों मे भी किया. आज भी रामकृष्ण मिशन की लगभग 130 शाखाएं भारत सहित विश्व के अन्य देशों मे स्थापित है.

स्वामी विवेकानन्द एक ऐसी संस्था स्थापित करना चाहते थे जिसके सदस्य सेवाभाव से देश के लोगों का नैतिक उत्थान कर उन्हे आत्मसम्मान तथा देशसेवा का पाठ पढ़ा सकें। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु उन्होंने रामकृष्ण मिशन नामक संस्था स्थापित की.

रामकृष्ण मिशन के उद्देश्य

स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन के तीन उद्देश्य निश्चय किये थे जो निम्नानुसार है
1. वेदान्त का प्रचार.
2. विभिन्न धर्मों के मध्य सौहार्द बढ़ाना.
3. गरीबों की सेवा ईश्वर की सेवा.

रामकृष्ण मिशन के सिद्धांत
1. ईश्वर एक है और आध्यात्मवाद का अनुसरण कर ब्रह्म मे लीन हो जाना ही मनुष्य का परम धर्म हैं.
2. प्रेत्यक व्यक्ति को अपने धर्म मे रहना चाहिए और उसी से प्रेम करना चाहिए.
3. हिन्दू धर्म के समस्त अंग सच्चे तथा रक्षणीय है तथा हिन्दू सभ्यता अति प्राचीन, सुन्दर एवं आध्यात्मिकता से परिपूर्ण है.
4. आत्मा अजर अमर हैं.
5. ज्ञान और भक्ति एक ही लक्ष्य की ओर ले जाने वाले दो मार्ग है.

6. हिन्दू धर्म का आधार वेदान्त धर्म है. वेदान्त के आधार पर ही धर्म के स्वरूप को समझा जा सकता है.
7. पाश्चिमी सभ्यता भौतिकवा और छल से युक्त हैं. अतः हिन्दूओं को अपने धर्म जाति समाज को पाश्चिमी सभ्यता से दूर रखना चाहिए.
8. मनुष्य की आत्मा ईश्वर है तथा उसे परमात्मा के दर्शन किसी भी स्थान मे हो सकते हैं. मूर्ति पूजा उपासना का अति शुद्ध तथा उच्च रूप हैं.

सन् 1899 ई. मे विकेकानन्द अमेरिका गये वहाँ के नगरों मे भी संस्था की शाखाएं स्थापित की. न्यायार्क की वेदान्त सोसाइटी को उन्होंने नवजीवन दिया एवं उसे आध्यात्मिक शिक्षा देने वाले केन्द्र मे परिणित कर दिया. स्वामी विवेकानन्द ने लाॅस, एन्जिल्स, केलीफोर्निया एवं सेन फ्रासिस्को मे भी वेदांत का प्रचार करने वाली समितियों का गठन किया.

रामकृष्ण मिशन का योगदान

रामकृष्ण मिशन की संस्थाएं भारत सहित अनेक देशो मै फैली हुई है, ये संस्थाएं हिन्दू धर्म की श्रेष्ठता के प्रचार तथा अंधविश्वास एवं छूआछूत को दूर करने के प्रयत्नों के अतिरिक्त और भी कई कल्याणकारी कार्यों मे लगी हुई हैं. अकाल, महामारी, बाढ़ तथा अन्य आपदाओं के समय रामकृष्ण मिशन के सदस्य सदैव आगे रहते है.
रामकृष्ण मिशन कई प्राइमरी, हाईस्कूल एवं कालेज चला रही हैं. रामकृष्ण मिशन के कई पुस्तकालय भी हैं. रामकृष्ण मिशन की तरफ से कई अनाथालय, औषधालयों, शिशु पालन गृह स्त्री कल्याण आदि मे महत्वपूर्ण योगदान हैं.

11 सितम्बर 1893 को विश्व धर्म संसद शिकागो मे स्वामी विवेकानन्द सभा को सम्बोधिति करते हुये कहा कि

” अमेरिका निवासी बहिनों एवं भाइयों!”

जिस सौहार्द एवं स्नेह के साथ आपने हम लोगों का स्वागत किया है उससे मेरा ह्रदय अत्यन्त प्रफुल्लित हैं. विश्व के प्राचीन महर्षियों के नाम पर मैं आपका धन्यवाद देता हूं तथा सभी धर्मों की मातास्वरूप हिन्दू धर्म एवं भिन्न-भिन्न सम्प्रदाय के लाखो-करोड़ों हिन्दुओं की ओर से धन्यवाद प्रकट करता हूं.

 

स्वामी विवेकानन्द ने अपने प्रवचों और भाषणों से पूरे विश्व को प्रभावित कर दिया था.

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