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एक्सिडेंट नहीं श्रीदेवी का हुआ था मर्डर, IPS अफसर का दावा- मेरे दोस्त के पास थे सबूत

by bnnbharat.com
July 12, 2019
in समाचार
एक्सिडेंट नहीं श्रीदेवी का हुआ था मर्डर, IPS अफसर का दावा- मेरे दोस्त के पास थे सबूत
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श्रीदेवी की मौत को लेकर केरल के डीजीपी जेल और आईपीएस अधिकारी ऋषिराज सिंह ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. उनका दावा है कि श्रीदेवी की मौत बाथटब में डूबने से नहीं हुई थी, बल्कि उनका मर्डर किया गया था. आईपीएस अधिकारी ऋषिराज सिंह ने अपने एक दोस्त के हवाले से ये दावा किया है. उनके दोस्त डॉ. उमादथन जाने-माने फोरेंसिक सर्जन थे. हाल ही में उनकी मौत हुई है. केरल के डीजीपी ऋषिराज सिंह ने अपने सर्जन दोस्त के हवाले से ये दावा किया है. उन्होंने लिखा, यह संभव ही नहीं है कि कोई एक फुट गहरे बाथटब में डूब जाए. किसी ने श्रीदेवी के दोनों पैर पकड़े थे, फिर उनके सिर को पानी में डुबोया गया था.
डॉ. उमादथन को क्राइम मामलों और खासतौर पर मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने का उस्ताद माना जाता था. केरल पुलिस जब कई मौकों पर मर्डर मामलों को नहीं सुलझा पाती थी, तब उमादथन को बुलाया जाता था. फॉरेंसिक के विद्वान डॉ. उमादथन की मर्डर मिस्ट्री केस सुलझाने की काबिलियत का लोहा केरल सरकार भी मानती है.
अब आईपीएस अधिकारी ने इसी क्राइम केस मास्टर के हवाले से श्रीदेवी की मौत पर बड़ा खुलासा किया है. न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (UNI) की एक खबर के अनुसार, ऋषिराज सिंह ने कहा, ‘मैंने जिज्ञासावश अपने दोस्त डॉ. उमादथन से श्रीदेवी की मौत के बारे में पूछा था. लेकिन उनके जवाब ने मुझे झकझोर कर रख दिया. उसने बताया कि वह पूरे मामले को बहुत करीब से देख रहा था. मामले पर रिसर्च के दौरान कई परिस्थितियां ऐसी बन रही थीं, जिनसे साफ हो रहा था यह एक एक्सिडेंट से हुई मौत नहीं थी. यहां तक उसकी रिसर्च के दौरान कई सबूत उभरे थे, जिनसे श्रीदेवी की मौत के मर्डर होने की पूरी आशंका उभरती है.’
डीजीपी ने लिखा है दोस्त की मौत पर आर्टिकल
असल में डीजीपी ‌ऋषिराज सिंह ने अपने दोस्त डॉ. उमादथन की मौत पर एक लेख लिखा है. इसमें उन्होंने अपने दोस्त की अपराध और मर्डर मिस्ट्री को लेकर चौंकाने वाली समझ का उल्लेख किया है. इसी में एक कोने में उन्होंने अपने दोस्त द्वारा श्रीदेवी की मौत पर दिए गए बयान का उल्लेख किया है. ऋषिराज सिंह लिखते हैं, ‘मेरे दोस्त ने बताया कि नशे में धुत कोई भी इंसान किसी भी परिस्थिति में महज एक फिट गहरे बाथटब में डूब नहीं सकता है.’
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 24 फरवरी को दुबई के एक होटल में श्रीदेवी की मौत हो गई थी. तब उनकी मौत का कारण एक दुर्घटना बताया गया था. बताया गया था कि उनकी मौत नशे की हालत में बाथटब में डूबने से हुई. श्रीदेवी वहां मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए गई थीं. लेकिन शादी के बाद वह वहां कुछ दिनों के लिए रुक गई थीं. इस दौरान उनके पति बोनी कपूर भी वहां पहुंचे हुए थे.
कोई और भी था रूम में?
डीजीपी जेल ने अपने लेख में क्राइम मामलों के जानकार अपने दोस्त के हवाले से लिखा, ‘यह संभव ही नहीं है कि कोई एक फुट गहरे बाथटब में डूब जाए. दोस्त ने बताया था कि बिना किसी के दबाव डाले किसी शख्स का सिर और पैर एक फुट गहरे बाथटब में नहीं डूबेगा. दोस्त का दावा था कि किसी ने उनके दोनों पैर पकड़े हुए थे, उसके बाद उनके सिर को पानी में डुबोया गया था.’
श्रीदेवी की मौत पर हुआ था विवाद, सबूतों के अभाव में नहीं पता चला था कारण
गौरतलब है कि श्रीदेवी की मौत के बाद दुबई पुलिस ने लंबी पड़ताल की थी. लेकिन सबूतों के अभाव में उनकी मौत का असल कारण नहीं पता चल पाया था. तब उनकी मौत को महज एक्सिडेंट बता दिया गया था. इस बाबत करीब डेढ़ साल बाद डीजपी ऋषिराज सिंह के अपने दोस्त के हवाले से लिखे गए लेख से फिर विवाद बढ़ा है.
हालांकि, डीजीपी अपने जिस दोस्त के हवाले से ऐसे दावे कर रहे हैं उनकी बीते बुधवार को 73 साल की उम्र में केरल के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई है. वह केरल सरकार के सबसे भरोसेमंद केस सुलझाने वाले डॉक्टर थे. केरल सरकार ने अलग से मेडिको-लीगल एडवाइजर का पद बनाकर उन्हें जोड़ा था. यहां तक की लीबिया की सरकार भी उनसे ऐसे मामलों में सहायता मांगती थी.
लीबिया के मेडिको-लीगल कंंसलटेंट रह चुके ‌थे डॉ. उमादथन
डॉ. उमादथन ने तिरुवनंतपुरम, अलपुझा, कोट्टायम, त्रिशूर के मेडिकल कॉलेजों में बतौर फॉरेंसिक मेडिसिन प्रोफेसर काम किया था. उन्हें ऐसे मामलों को सुलझाने के‌ लिए लीबियाई सरकार ने अपना मेडिको-लीगल कंंसलटेंट भी बनाया था.
उन्हें आपराधिक मामले निपटाने में विज्ञान के प्रयोगों के लिए जाना जाता था. उन्हें कई अप्राकृतिक मौतों की पड़ताल के लिए केरल पुलिस ने चुना था. वह फॉरेंसिक मेडिसिन के व्यावहारिक तरीकों से जांच-पड़ताल करते थे. वे फॉरेंसिक मेडिसिन पुलिस का हिस्सा थे. उन्हें पुलिस सर्जन के नाम से बुलाया जाता था. उन्होंने इस विषय पर कई किताबें भी लिखी थीं.

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