New Delhi:- जहां आम तौर पर राज्य पुलिस द्वारा कोयला तस्करों और बालू माफियाओं से अवैध वसूली और हेलमेट चेकिंग व अन्य काग़ज़ात जाँच के नाम पर अनावश्यक लोगों को परेशान करके हर महीने लाखों करोड़ों रूपयों की लेन देन की बातें आती है उसी राज्य की पुलिस को एक लापता नाबालिग को खोजने के लिए जाने के लिए पीड़ित गरीब घरवालों के चंदे से इकट्ठे पैसे से भाड़े पर गाड़ी लेनी पड़ रही है.
दस दिन हो चुके है लेकिन हेमंत सरकार में अपराधियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि राँची पुलिस अब तक नाबालिग को ढूँढ पाने में नाकाम है. क्या अब इस सरकार में अनुसंधान या जाँच हेतु किसी स्थान पर जाने के लिए पुलिस की गाड़ी के लिए गरीब लोगों को पैसे देने होंगे? यह गंभीर मामला है और भारतीय जनता पार्टी राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से माँग करती है कि थानों को अनुसंधान और अन्य पुलिसिया प्रक्रियाओं के लिए समुचित संसाधन दिए जाएँ ताकि गरीब लोगों पर पुलिस आर्थिक दवाब न बनाए.
जहां राज्य में वैसे भी प्रतिदिन हो रहे बलात्कार और महिला उत्पीडन की घटनाओं से झारखंड की बहन बेटियाँ सशंकित हैं वैसी परिस्थितियों में क़ानून की रक्षक पुलिस द्वारा जाँच और कार्यवाही हेतु संसाधनोंकी ज़रूरत के लिये पीड़ित परिवार पर आर्थिक दवाब देना दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है. भाजपा झारखंड प्रदेश इस मामले की जाँच कर ऐसे ग़ैर ज़िम्मेदार पुलिस पदाधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही करने की माँग करती है.

