रांची: पारा शिक्षकों के आंदोलन पर हेमंत सोरेन की सरकार सख्त हो गई है. सरकार ने स्कूल छोड़कर धरना-प्रदर्शन के लिए गायब रहने वाले शिक्षकों के लिए नो वर्क-नो पे का फॉर्मूला लागू कर दिया है. साथ ही कहा है कि ऐसे पारा शिक्षकों पर अनुशासनिक कार्रवाई भी होगी. दरअसल, पारा शिक्षकों ने 15 से 19 मार्च तक विधानसभा घेराव की घोषणा की है. इसके बाद ही राज्य परियोजना निदेशक ने इसे लेकर आदेश जारी किया ह
निदेशक के आदेश में कहा गया है कि पारा शिक्षकों को धरना, प्रदर्शन, घेराव आदि के लिए स्कूलों से अनुपस्थिति को अनधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा. ऐसे पारा शिक्षकों पर नो वर्क नो पे लागू होगा. इस अवधि में पारा शिक्षकों को अति विशेष परिस्थिति में ही गंभीर बीमारी, अस्वस्थता के आधार पर अवकाश स्वीकृत होगा. प्रदेशभर के पारा शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है.
इधर, एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने इस आदेश को तुगलकी फरमान कहा है. माेर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि पारा शिक्षक बिना डरे जिलावार शेड्यूल के अनुसार घेराव कार्यक्रम में शामिल होंगे. जब तक हमारी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती तो आंदोलन करते रहेंगे. बता दें कि पारा शिक्षकों ने अपनी इन मांगों को लेकर 15 से 19 मार्च तक विधानसभा घेराव की घोषणा की है. यह घेराव कार्यक्रम प्रमंडलवार अलग-अलग दिनाें में होगा.
गौरतलब है कि पारा शिक्षकों के लिए कल्याण कोष से लेकर स्थायीकरण व वेतनमान देने की दिशा में आगे बढ़ रही राज्य सरकार पारा शिक्षकों के आंदोलन पर अब सख्त हो गई है. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने बच्चों की शिक्षा को देखते हुए पारा शिक्षकों के 15 से 19 मार्च तक प्रस्तावित विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को अनुचित करार दिया है साथ ही इस अवधि में सभी पारा शिक्षकों को स्कूलों में उपस्थिति सुनिश्चित कराने का आदेश सभी जिला शिक्षा अधीक्षकों को दिया है.

