जमशेदपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ’वोकल फोर लोकल’ का कांसेप्ट लोगों को बेहद पसंद आया है और इस बार इसकी झलक राखी के त्यौहार में भी देखने को मिलेगी. जमशेदपुर में कला मंदिर के कलाकार आजकल बड़े पैमाने पर राखी बना रहे हैं जो झारखंड के सभी आर्मी कैंप में मौजूद जवानों की कलाई में बाँधी जाएगी. इस कार्य में “रंग दे“ संस्था भी सहयोग कर रही है.
आत्मनिर्भर भारत और ’वोकल फोर लोकल’ को देशवासियों ने दिल से अपनाया है जिसकी बानगी इसबार राखी के त्यौहार में भी नज़र आएगी. जमशेदपुर में कला मंदिर के कलाकार बड़े पैमाने पर आजकल राखी बना रहे हैं जो आर्मी कैंप में मौजूद जवानों की कलाईयों की भी शोभा बढ़ाएंगे. कला मंदिर के संस्थापक सचिव अमिताभ घोष ने बताया कि बहन कलाकारों द्वारा जवानों को यह राखी बाँधी जाएगी.
उन्होंने बताया कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए राखी के निर्माण में खजूर और ताड़ के पत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे स्वदेशी की खुशबू मिलेगी. इस राखी निर्माण का एक दूसरा पहलु यह है कि इसके ज़रिए कोरोना काल में दर्जनों लोगों को रोज़गार भी मिला है.
राखी बनाने के काम में लगे देवना मुर्मू एवं हरीश चंद्र साहू बताते हैं कि राखी निर्माण में प्लास्टिक छोड़कर वैसे सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे. इसमें एक विशेष प्रकार के घास का प्रयोग भी हो रहा है.
इधर राखी बना रहीं महिलाएं इस बात को लेकर उत्साहित हैं की उनके हांथ से बनी राखियाँ देश के फौजी जवान भाइयों की कलाईयों को इस बार सुशोभित करेंगीं. ये राखियां पर्यावरण अनुकूल तो होंगी ही, पहनने में भी काफी हल्की और आरामदेह होंगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद ’लोकल फोर लोकल’ अब जीने की राह बन चुका है. जमशेदपुर के ये राखी कलाकार जहाँ अपनी कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहे हैं. वहीं विदेशी राखी को रोकने और स्वावलंबी बनने तथा फौजी जवान भाइयों का मनोबल बढ़ाने का का भी यह महत्वपूर्ण जरिया बनेगा.

