रांची: रांची विमेंस कॉलेज के एनएसएस यूनिट की ओर से सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के सहयोग से फाइनेंशियल अवेयरनेस पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया. इस मौके पर सेबी के डीजीएम निर्दोष रंजन मींस ने सिक्योरिटी मार्केट, इन्वेस्टमेंट सेविंग, रिस्क, रिटर्न और म्यूच्यूअल फंड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी.
उन्होंने छात्राओं को बताया कि सेबी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय स्टॉक निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना और बाजार के विकास तथा नियमन को प्रवर्तित करना है. सेबी को एक गैर वैधानिक संगठन के रूप में स्थापित किया गया है, जिसे SEBI ACT1992 के अन्तर्गत वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है.
25 जनवरी 1995 को सरकार द्वारा पारित एक अध्यादेश के द्वारा पूंजी के निर्गमन, प्रतिभूतियों के हस्तांतरण तथा अन्य संबंधित मामले के सम्बन्ध में सेबी को नियंत्रक शक्ति प्रदान कर दिया गया है. वर्तमान कानूनों तथा नियंत्रण में परिवर्तन के सम्बन्ध में सेबी अब एक स्वायत्त संस्था है और अब उसे सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं.
इस कार्यक्रम में एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ गीता सिंह और डॉ कुमारी उर्वशी के साथ डॉ अनीता मेहता डॉ स्मिता लिंडा और लगभग डेढ़ सौ छात्राओं ने भाग लिया. यह जानकारी प्रेस इंचार्ज डॉ कुमारी उर्वशी ने दी है.
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:
1. प्रतिभूति बाजार (सिक्योरिटीज मार्केट) में निवेशकों के हितों का संरक्षण तथा प्रतिभूति बाजार को उचित उपायों के माध्यम से विनियमित एवं विकसित करना.
2. स्टॉक एक्सचेंजो तथा किसी भी अन्य प्रतिभूति बाजार के व्यवसाय का नियमन करना.
3. स्टॉक ब्रोकर्स, सब-ब्रोकर्स, शेयर ट्रान्सफर एजेंट्स, ट्रस्टीज, मर्चेंट बैंकर्स, अंडर-रायटर्स, पोर्टफोलियो मैनेजर आदि के कार्यों का नियमन करना एवं उन्हें पंजीकृत करना.
4. म्यूचुअल फण्ड की सामूहिक निवेश योजनाओ को पंजीकृत करना तथा उनका नियमन करना.
5. प्रतिभूतियों के बाजार से सम्बंधित अनुचित व्यापार व्यवहारों (Unfair Trade Practices) को समाप्त करना.
6. प्रतिभूति बाजार से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करना तथा निवेशकों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना.
7. प्रतिभूतियों की इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाना.

