रांची: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने पुलिस महानिदेशक पद पर प्रभारी महानिदेशक की नियुक्ति किए जाने वाले याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखण्ड के डीजीपी एम०वी० राव की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी.
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यह सर्विस मैटर से जुड़ा मामला है, इसे जनहित याचिका नहीं माना जा सकता है. प्रह्लाद नारायण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति को चुनौती दी थी . बुधवार 19 अगस्त को करीब 15 मिनट तक चली सुनवाई के दौरान भारत की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया .
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस० नारीमन, झारखंड सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अपना पक्ष रखा , जबकि याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता वेंकट रमण ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया.
झारखंड सरकार की ओर से राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि , प्रह्लाद नारायण सिंह के द्वारा दायर जनहित याचिका विचार योग्य नहीं है. यदि संघ लोक सेवा आयोग के पैनल से नाम भेजा जाएगा तो राज्य सरकार पुलिस महानिदेशक की नियमित नियुक्ति कर लेगी. सभी पक्षों को सुनने के उपरांत सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी.

