शिमला: अक्सर सुर्खियों में रहने वाला हिमाचल का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) एक बार फिर विवाद में आ गया है. इस बार मामला एक महिला की मौत (Women Death) को लेकर है. प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी (IGMC) पर एक सेवानिवृत्ति प्रोफेसर ने अपनी पत्नी की मौत को लिए जिम्मेदार ठहराया है .प्रोफेसर ने आईजीएमसी प्रबंधन पर लापरवाही और अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसका खामियाजा उन्हें पत्नी की जान गंवाकर भुगतना पड़ा है.
केस दर्ज करने की मांग
प्रोफेसर पति ने मामले पर उस दिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. मंगलवार को सेवानिवृत्त डॉ संजोग भूषण ने शिमला में प्रेसवार्ता के माध्यम से आरोप लगाया है कि 30 अक्टूबर को उनकी पत्नी आंख का उपचार करके चंडीगढ़ से आईजीएमसी गई, जहां उनका कोरोना टेस्ट किया गया, लेकिन कोरोना टेस्ट नेगेटिव आने में बाद उन्हें आईजीएमसी के ट्राइस वार्ड के लिए भेजा गया.
ट्राइस वार्ड में मेडिकल स्टाफ ने बरती लापरवाही
शाम को वे अपने घर चले गए तो उन्होंने अपने भाई को वहां रहने को कहा. दूसरे दिन बिना किसी उपचार के उनकी पत्नी की करीब 2 बजे मौत हो गई, जबकि इसकी सूचना शाम 6 बजे फोन के माध्यम से उन्हें दी गई.इसका उन्हें बड़ा सदमा लगा और अभी तक उभर नहीं पाए.सवा महीना बीत जाने के बाद जब वे सदमे से उभर पाए हैं और अब अस्पताल प्रशासन से लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. यदि सोमवार तक आईजीएमसी प्रबंधन कोई कार्रवाई नहीं करता है तो वे एमएस कार्यालय के बाहर आमरण अनशन पर बैठेंगे. उन्होंने कहा कि जब उनकी पत्नी कोई कोरोना से सम्बंधित कोई बीमारी नहीं थी तो एक दिन के भीतर कैसे उनकी मृत्यु हो गई. उन्होंने आईजीएमसी प्रशासन से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

