नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार घोषित किए गए स्वपन दासगुप्ता ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है.
भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व पत्रकार स्वपन दासगुप्ता को पश्चिम बंगाल में तारकेश्वर सीट से उम्मीदवार बनाया है. स्वपन दासगुप्ता राज्यसभा में मनोनीत सांसद थे.
इसी बात को लेकर विपक्षी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठाए थे और कहा था कि मनोनीत सदस्य होने के नाते पहले उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए, फिर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए.
राज्यसभा के चेयरमैन और उपराष्ट्रति वेकैंया नायडू को कांग्रेस के चीफ़ व्हीप जयराम रमेश ने चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि स्वपन दासगुप्ता ने न तो सदन से त्यागपत्र दिया है और न ही कोई पार्टी ज्वाइन की है, फिर भी वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.
अपनी चिट्ठी में जयराम रमेश ने लिखा है- “क्या राज्यसभा का कोई मनोनीत सदस्य, जिसने नामांकन के छह महीने के अंदर कोई पार्टी ज्वाइन नहीं की और राज्यसभा में वो किसी पार्टी का सांसद नहीं है, वो मनोनीत सदस्य के पद से इस्तीफ़ा दिए बिना संसदीय या विधानसभा चुनाव कैसे लड़ सकता है?”
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी आरोप लगाया था कि स्वपन दासगुप्ता ने संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन किया है.
महुआ मोइत्रा ने संविधान की 10वीं अनुसूची को ट्वीट करते हुए लिखा है कि संविधान के मुताबिक़ अगर कोई मनोनीत सांसद शपथ लेने के छह महीने के बाद किसी पार्टी की सदस्यता लेता है, तो उसकी सदस्यता चली जाएगी.
महुआ ने लिखा है कि स्वपन दासगुप्ता ने अप्रैल 2016 में शपथ ली थी और अभी तक वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं. इस अधार पर बीजेपी में शामिल होने के कारण उनकी राज्यसभा सदस्यता ख़त्म कर देनी चाहिए.

