शूयोपुर: कलेक्टर राकेश कुमार श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सिंथेटिक पायरेथ्राइड 5 प्रतिशत कीटनाशक दवाई का छिड़काव जिले में किया जा रहा है. उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि मलेरिया फैलने वाले मछरो से बचाव हेतु कीटनाशक दवा का छिड़काव अवश्य कराये.
कलेक्टर आरके श्रीवास्तव ने कहा है कि मलेरिया एक तेज बुखार वाली बीमारी है. जो कि संक्रमित मादा एनाफिलीस मछर काटने से फैलती है. मलेरिया फैलाने वाले परजीवी का नाम प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम/प्लाज्मोडियम वायरस है.
इसी प्रकार जब मादा एनाफिलीज मछर किसी मलेरिया के व्यक्ति को काटती है. उसके खून में उपस्थित परजीवी को अपने शरीर में खींच लेती है. जब यह संक्रमित मछर किसी रोगी व्यक्ति को काटता है, तो अपने शरीर में पल रहें. मलेरिया परजीवी को उसके शरीर में छोड देती है.
सीएमएचओ डाॅ एआर करोरिया ने बताया कि मलेरिया फैलने वाले मछर घरो की छत एवं दीवार पर बैठते है. और कीटनाशी छिडकाव किये गये सतह पर मछर बैठने पर मर जाते है. जिससे मलेरिया बीमारी पर नियंत्रण तो होता है.
वहीं मच्छरों के प्रकोप से राहत होती है. सभी स्थानों पर छिड़काव नहीं होता है, तो मच्छर वहीं बैठते है. जहां उन्हें नुकसान नहीं पहुंचता. मच्छरों के बैठने की जगह सभी सतरों पर छिड़काव होना ही चाहिए.
दीवारो पर से फोटो, कैलेण्डर आदि हटाकर समान जो हटाये जा सकते है. उन्हें हटाकर छिड़काव करवाया जाना चाहिए. यदि घर के बाहर छिड़काव कराते है. तब मच्छर घर के अंदर बैठते है और बीमारी फैलाते है. इसलिए कीटनाशक दवा का छिड़काव अवश्य कराया जाये.
जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ एसएन बिंदल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन कमरों में छिड़काव नहीं कराते है. उन कमरों में मच्छर बैठते है. अतः सभी कमरों में छिड़काव अवश्य कराये. कीटनाशक दवाई जहरीली है.
अतः खाने पीने की चीजे पूर्ण सरक्षित रखी जाये और दवाई से किसी भी प्रकार से प्रभावित न हो. छिड़काव कार्य के बाद 6-10 सप्ताह या ढ़ाई माह तक घर में लिपाई-पुताई नहीं की जाना चाहिए. लिपाई-पुताई के कारण कीटनाशक दवाई का प्रभाव कम हो जाता है.

