BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

कोरोना के दौर में मां और बच्चे की सुरक्षा का रखें ख्याल

by bnnbharat.com
June 17, 2020
in समाचार
कोरोना के दौर में मां और बच्चे की सुरक्षा का रखें ख्याल
Share on FacebookShare on Twitter

प्रसांता दास, यूनिसेफ प्रमुख, झारखंड

रांची:  कोविड-19 महामारी और इसके परिणामस्वरूप लाॅकडाउन ने हमारे जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित किया है. इसके कारण जैसे-जैसे हमारी गतिविधियां प्रतिबंधित हुई, हमारे लिए उन सुविधाओं का लाभ उठाना एक चुनौती बन गया, जो हमारे लिए जरूरी था, इसमें गर्भवती महिलाओं, माताओं एवं बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति भी शामिल है.

प्रसव पूर्व जांच, नियमित टीकाकरण, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (VHNDs) जैसी कई सेवाएं महामारी के कारण शुरूआत में प्रभावित हुई.
पिछले कुछ हफ्तों से पूरे झारखंड में इन सेवाओं की क्रमिक बहाली हुई है, क्योंकि लाॅकडाउन में छूट दिए जाने के बाद गांव, ब्लाॅक और जिला स्तर पर आवश्यक सेवाओं की बहाली को सुनिश्चित किया गया है. तथा ग्राम, प्रखंड तथा जिला स्तर पर संस्थानों ने काम करना और इन सेवाओं को सुचारू रूप से लोगों तक पहुंचाने का काम भी प्रारंभ कर दिया है. इस समय जबकि कोविड-19 हमारा मुख्य फोकस है, यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि गर्भवती महिलाएं, माताएं तथा छोटे बच्चों को दी जाने वाली आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति जारी रहे, ताकि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रहे और उन्हें बचावजनित रोगों से सुरक्षा प्रदान किया जा सके.
कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी भी राज्य में लौटे हैं, उनमें गर्भवती महिलाएं तथा बच्चे भी शामिल हैं. प्रवासियों के लिए जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं – जैसे कि प्रसवपूर्व तथा प्रसवोत्तर देखभाल, संस्थागत प्रसव तथा नियमित टीकाकरण जैसी सेवाओं की पूर्ति आवश्यक है, ताकि सुरक्षित गर्भधारण एवं सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित किया जा सके तथा बीमारी के प्रसार को रोका जा सके.

समय के साथ, झारखंड सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए हैं, जैसे कि सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समुदायों में तथा क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों की पहचान कर उनके देखभाल और आवश्यकताओं की पूर्ति को सुनिश्चित करें. इसी प्रकार से सभी जिले राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत गर्भवती महिलाओं, बच्चों तथा अन्य लाभार्थियों की सूची तैयार कर रहे हैं तथा उन्हें अस्पतालों या सुविधा केंद्रों (VHNDs) से जोड़ रहे हैं.
लाॅकडाउन के दौरान राज्य में मार्च तथा अप्रैल के महीने में नियमित टीकाकरण का कवरेज कम हो गया था. हालांकि, मई के महीने में टीका की आपूर्ति पुनः बहाल कर दी गई जिसके बाद टीकाकरण सेवा भी क्षेत्रों में प्रारंभ कर दी गई है.

राज्य सरकार ने नियमित स्वास्थ्य सेवाओं जैसे कि अंतः एवं बाह्य रोगी विभागों, सुविधा आधारित-मातृत्व एवं नवजात शिशु देखभाल, ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस, संस्थागत प्रसव, परिवार नियोजन सेवाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली नियमित स्वास्थ्य सेवाएं भी शुरू की हैं. फिलहाल केवल कंटेनमेंट जोन में ही आउटरीच सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं. सरकार के द्वारा प्रखंड स्तर पर सेवाओं के प्रावधान की निगरानी तथा समीक्षा की जा रही है तथा उन लोगों को शामिल करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जिन्हें या तो छोड़ दिया गया है या बाहर कर दिया गया है.

राज्य ने बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की पहचान के लिए हेड काउंट सर्वे कराने की भी योजना बनाई है, ताकि उन्हें तुरंत आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके.

मैं पाठकों से अनुरोध करता हूं कि संस्थागत प्रसव, बीमार नवजात के लिए बनाई गई विशेष नवजात देखभाल इकाई, कुपोषित बच्चों के लिए कुपोषण उपचार केंद्र तथा अन्य दूसरी सेवाएं जो कि सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है उसका लाभ उठाएं. इसके साथ ही, मैं अस्पताल तथा आउटरीच सत्रों में जाने के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने का भी आग्रह करता हूं, जैसे कि मास्क पहनना, नियमित तौर पर हाथ धोना तथा अनावश्यक रूप से दीवालों एवं सतहों को छूने से बचना आदि। यह आपको सुरक्षित रखने के साथ-साथ हमारे फ्रंटलाइन वर्करों, डाॅक्टरों तथा नर्सोें को भी सुरक्षित रखेगा, जिससे वे बिना किसी परेशानी के अपनी सेवा निर्बाध जारी रख सकेंगे.

महामारी के दौर में आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को पुनः बहाल करने में उत्साही एवं प्रतिबद्ध फील्ड वर्करों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं तथा एएनएम ने इस दौरान गर्भवती माताओं तथा टीकाकरण से वंचित बच्चों की सूची को अद्यतन रखा. ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस का कार्यक्रम भी पुनः सारे राज्य में प्रारंभ कर दिया गया है. कोविड-19 महामारी के साथ-साथ स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं से निपटने में हमारे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बढ-चढ़कर काम किया है.

माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों के लिए कोरोना संक्रमण से भयभीत होना स्वाभाविक ही है. खासकर जब वे स्वास्थ्य केंद्र जा रहे हों. स्वास्थ्य केंद्रों के दौरे में इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें तथा अपने हाथों एवं श्वसन तंत्र की सफाई का ध्यान रखें, जो कि उनके खुद के तथा स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है.

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शुरूआती स्तर पर जोखिमों की पहचान करने तथा परिहार्य बीमारियों तथा मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करने के लिए मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सुविधाओं को सुनिश्चित करना आवश्यक है.
कोरोना वायरस एक ऐसी दुनिया में आया है, जहां हम पहले से ही कई अन्य स्वास्थ्य जनित चुनौतियों से जुझ रहे हैं. जबकि हम इस नई बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए सभी उपायों को अपना रहे हैं, हमें हमने प्रियजनों के अन्य स्वास्थ्य जरूरतों का भी ध्यान रखना चाहिए.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

कब मिलेगा चीन को करारा जवाब: संजय राउत

Next Post

रक्षा मंत्रालय में हाई लेवल मीटिंग, CDS बिपिन रावत भी शामिल

Next Post
रक्षा मंत्रालय में हाई लेवल मीटिंग, CDS बिपिन रावत भी शामिल

रक्षा मंत्रालय में हाई लेवल मीटिंग, CDS बिपिन रावत भी शामिल

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d