गोरखपुर: एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्ता की उम्र भले ही 104 वर्ष हो गई है, लेकिन उनका हौसला नौजवानों जैसा है. तभी तो इस उम्र में भी कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद भी हिम्मत नहीं टूटी. रोजाना अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर यूनियन का कामकाज निपटाते हैं और जरूरी निर्देश भी देते हैं. उनके करीबी यूनियन में सहायक महामंत्री नवीन मिश्रा कहते हैं, इस उम्र में इतनी ऊर्जा मैंने नहीं देखी है. उनकी स्मृति गजब की है. रोजाना फोन करके हालचाल लेना नहीं भूलते.
104 साल की उम्र में भी रेल कर्मचारियों की आवाज बुलंद करने वाले कामरेड लगातार 60 साल पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री हैं। उन्होंने सेना से लेकर रेलवे तक 35 साल सेवाएं दी हैं. इसके बाद 40 साल से पेंशन ले रहे हैं. अभी फिटनेस ऐसी कि 104 साल की उम्र में यूनियन के हर प्रदर्शन और जुलूस की खुद अगुवाई करते हैं. इसी सक्रियता के बूते यूनियन में उनकी लोकप्रियता अब भी कायम है और तभी तो वह 70 साल से यूनियन के निर्विवादित चेहरा हैं.
पिछले 70 साल से यूनियन में रहते हुए कर्मचारियों के लिए संघर्ष के दौरान वह पांच बार जेल की हवा भी खा चुके हैं. बातचीत में कहते हैं कि उनके जीवन का एक ही उद्देश्य है. जब तक शरीर में प्राण है, तब तक मैं मजदूरों के लिए लड़ता रहूं. मेरे पैर कहीं डगमगाए नहीं, यही ईश्वर से कामना करता रहता हूं.
जेपी से लेकर जार्ज फर्नांडीज तक का सानिध्य मिला
1924 में एआइआरएफ का गठन हुआ. 1951 में एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) अस्तित्व में आई. केएल गुप्त पहले महामंत्री बने. साथ ही एआईआरएफ के पदाधिकारी भी चुने गए। तब पूर्वोत्तर रेलवे अवध-तिरहुत रेलवे के नाम से जाना जाता था. उस दौर में केएल गुप्त को जय प्रकाश नारायण, बीबी गिरि, जार्ज फर्नांडिस और बसावन सिन्हा का सानिध्य लाभ भी मिला. यह सभी जननायक अपने समय में एआईआरएफ के अध्यक्ष रह चुके हैं.
नरमू दफ्तर मेरा घर, रेलकर्मी परिवार के सदस्य
केएल गुप्त बताते हैं कि जब वे रेलकर्मियों के बीच होते हैं तो उन्हें अंदर से ऊर्जा मिलती है. रेलकर्मियों की समस्याओं का समाधान कराना ही जीवन का लक्ष्य है. वह कहते हैं कि नरमू दफ्तर ही उनका घर है और रेलकर्मी परिवार के सदस्य. पिछले साल जनवरी में उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी. लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद स्वस्थ हुए तो फिर दोगुनी ऊर्जा से संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं.

