रंजीत कुमार,
सीतामढ़ी: सूबे के नियोजित शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए बहुप्रतीक्षित सेवाशर्त को राज्य सरकार ने 18 अगस्त को पारित कर दिया . सेवाशर्त में ऐच्छिक स्थानान्तरण ग्रेच्युटी बीमा अवकाश पैंशन समेत शिक्षकों के तमाम मांगों को सिरे से दरकिनार कर दिया गया है साथ ही टीइटी-एसटीइटी के लिए अलग कैडर की मांग को भी कोई जगह नही दिया गया| सूबे के टीइटी एसटीइटी शिक्षकों ने संघ के आह्वाहन पर प्रखंड मुख्यालयों पर नई सेवाशर्त की कॉपी को जलाकर राज्यव्यापी काला दिवस मनाया और अपना विरोध दर्ज किया.
जिला मुख्यालय में अध्यक्ष विकाश कुमार सिंह और डुमरा प्रखंड अध्यक्ष राजेश झा के नेतृत्व में सेवाशर्त की प्रति जलाई गई, वहीं रुन्नीसैदपुर प्रखंड कार्यालय में प्रखंड अध्यक्ष मयंक कुमार व अभिषेक वर्मा के नेतृत्व प्रतियों को जलाकर अपना विरोध दर्ज किया. वही परसौनी प्रखंड मुख्यालय पर जिला महासचिव रामलाल साह के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन दर्ज कर, इस नए सेवाशर्त को शिक्षको द्वारा नकार दिए जाने का स्पष्ट संदेश सरकार को भेजा.
प्रदेश सचिव अमित कुमार ने इसे इस सेवाशर्त को हास्यास्पद बताया है और कहा है कि शिक्षको के लिए जब पहले से ही सेवा शर्त है तो किसी और सेवा शर्त की आवश्यकता ही नही. सरकार उसे ही लागु करें. जिला मीडिया प्रभारी अभिषेक वर्मा ने इसे चुनावी जुमला करार दिया और कहा कि यह देश का पहला मामला है जब कैबिनेट से कोई मसौदा चुनाव से पहले पास हुआ और लागू चुनाव के बाद. यह अपने आप मे ही हास्यास्पद है.
इस मौके पर राजेश झा, श्यामू कुमार, अनिल कुमार, दीपक कुमार, मृत्युंजय कुमार, अनुज कुमार, अमित कुमार, संतोष कुमार मिश्र, दिलीप कुमार झा समेत सभी मुख्यालयों पर दर्जनों शिक्षको ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सेवाशर्त की प्रतियां जलाई .

