रांची: आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार सबसे अधिक किफायती थाली झारखंड में थी. झारखंड में दो शाकाहारी थालियों के लिए पांच सदस्यों वाले परिवार के वास्ते श्रमिकों की दैनिक मजदूरी को लगभग 25 प्रतिशत की जरूरत थी. वहीं मांसाहारी थाली भी झारखंड में सबसे अधिक वहनीय थी.
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2006-07 और 2019-20 के बीच तुलना से पता चलता है कि शाकाहारी थाली देश के अन्य राज्यों से अधिक किफायती बन गयी है. वहीं मांसाहारी थाली के मामले में इस अवधि में बिहार और महाराष्ट्र को छोड़कर सभी राज्यों में वहन क्षमता बढ़ी है. इन दो राज्यों में मामूली गिरावट देखी गयी है.
थॉलीनॉमिक्सः भारत में भोजन की थाली का अर्थशास्त्र है, जिसमें इसका आकलन किया जाता है कि भारत में पौष्टिक थाली के लिए आम आदमी को कितना खर्च करना पड़ता है, थाली अधिक वहन योग्य हुई है या कम. मुद्रास्फीर्ति ने थाली के मूल्य को बढ़ाया अथवा घटाया है. क्या भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में थाली के मूल्य में परिवर्तन, अन्न, सब्जियों, दालों व भोजन पकाने में उपयोग किये जाने वाले इंधन में से किस घटक मूल्य में परिवर्तन होने के कारण है. ये ऐसे प्रश्न है, जो दिल्ली में अथवा देश के किसी भीतरी भाग में सड़क किनारे ढाबे में संवाद का विषय बन सकते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार 2006-07 से 2019-20 के दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि को थाली के माध्यम से देखा गया. 2015-16 से शाकाहारी थाली की कीमतों में अखिल भारतीय स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर गिरावट देखी गयी. यद्यपि इस वर्ष थाली की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. ऐसा सब्जियों और दालों की कीमतों में पहले के सालों के मुकाबले में आई गिरावट के कारण हुआ है. सभी अन्य घटकों और थाली की कीमतों में गिरावट के कारण समीक्षा अवधि के दौरान गिरावट की प्रवृति देखने को मिली. थाली की वहन करने की क्षमता में कामगारों के वेतन के मुकाबले सुधार से आम व्यक्ति के कल्याण में बेहतरी का संकेत मिलता है.

