जावेद अख्तर
गोड्डा: बीते बुधवार को महागामा थाना क्षेत्र के महुआरा गांव में बाली बाबू बांध से एक शव को बरामद किया गया था. जिसकी पहचान महूआरा गांव निवासी विनोद राय(42) के रूप में हुआ था. मृतक विनोद राय की पत्नी ने महागामा थाना में 6 नामजद अभियुक्त के विरूद्ध हत्या का मामला दर्ज कराया. इधर महूआरा निवासी रंजीत भगत ने अपने ऊपर लगे हत्या के संगीन आरोप को साजिश व झूठा बताया.
उन्होंने कहा कि हमलोगों को कानून पर पूर्ण विश्वास है. हमलोग निर्दोष है हम चार भाइयों को इस झूठे केस में फंसाया गया है. वहीं इसी सम्बन्ध को लेकर आरक्षी अधीक्षक गोड्डा, आरक्षी महानिरीक्षक संथाल परगना एवं आरक्षी उपमहानिरीक्षक संथाल परगना दुमका को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग किया हूँ ताकि हमलोगों के ऊपर लगे इस तरह के संगीन आरोप का गहनता से जांच हो. वहीं दिए गए आवेदन में कहा है कि पूर्व से ही हमलोगों को झूठा केश में फंसाया जा रहा है. मेरे परिवार के सदस्यों को गांव के कुछ लोगो द्वारा बार बार टारगेट किया जाता है. ऐसे लोगों का मास्टरमाइंड विशु राय है. विकृत एवं आपराधिक मानसिकता के इस व्यक्ति का लक्ष्य गांव के पढ़े लिखे प्रतिष्ठित लोगों को झूठे मुकदमे में फंसा कर धन ऐंठना रहा है. पहले इस गांव में विशु राय के गैंग में जयकांत यादव भी शामिल था. दोनों ने मिलकर विगत 5/10/2012 को मुझे और मेरे पांच भाइयों को अपरहण केश में फंसाया था। गोड्डा नगर थाना कांड संख्या 468/12 अंकित किया गया था. बाद में यह केश झूठा साबित हुआ.

एसपी गोड्डा के ज्ञापांक 2148/ सीआर, वि प्र संख्या 450/12 दिनांक 31/10/2012 इस केस को निरस्त कर दिया गया था. वहीं इस मुकदमे में इस गैंग को मेरे परिवार वाले से कोई धन हाथ न लगा. इसलिए विशु राय और जयकांत यादव में बिखराव हो गया. विशु राय तब से एक अलग गैंग बनाकर चोरी, छिनतई जैसे घटनाओं को अंजाम देता आ रहा है. जयकांत यादव को भी विशु राय द्वारा बर्बाद कर देने की धमकियां दी गयी थी. पिछले वर्ष 2019 को विशु राय ने महागामा थाना में आवेदन देकर कांड संख्या 35/19 दिनांक 17/2/2019 अंकित कराया। इस मुकदमे में 307 जैसे संगीन धारा लगाया गया था. इस कांड में जयकांत यादव व उसके एक भाई तथा मुझे औऱ मेरे तीन भाइयों को अभियुक्त बनाया गया था. हमलोगों के ऊपर दो लाख रुपया लेकर केश उठाने का बताया गया. मैंने पुनः तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को वस्तु स्थिति की जानकारी दी. बाद में एसडीपीओ महागामा और पुलिस जांच में हम सभी भाइयो का नाम केश संख्या 35/19से विलोपित किया गया. इस बार भी विशु राय को पैसा हाथ न लगा। अब विगत 13 मई को कांड संख्या 72/20 में मुझे और मेरे तीन भाइयों को 302 जैसे संगीन धाराओ में फंसाया गया है. विशु राय मृतक विनोद राय का छोटा चाचा है. उसी ने मृतक के पत्नी के ऊपर दबाव डालकर हमलोगों को फंसाया गया है. मृतक विनोद राय गांव का होनहार व हंसमुख युवक था. गांव में किसी से उसका झगड़ा व शत्रुता नही था. विनोद राय की मौत कैसे हुई यह पुलिस के जांच का विषय है. लेकिन हम भाइयो को पैसा ऐंठने व साजिश के तहत फंसाया गया है. हमलोग पुलिस जांच में हमेशा सहयोग के लिए तैयार है और हमें कानून पर पूर्ण विश्वास है.

