डीवीसी के बकाया भुगतान के एवज में झारखंड सरकार के खाते से करीब 2100 करोड़ रुपये काटने से घोषणा अधर में लटकी
रांची: झारखंड में गठबंधन सरकार की ओर से राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं को 100 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की गयी थी, लेकिन सरकार गठन के करीब 13 महीने बाद भी यह वायदा धरातल पर नहीं उतर पाया है.
वहीं त्रिपक्षीय समझौते के तहत डीवीसी के बकाया भुगतान के एवज में झारखंड सरकार के खाते से आरबीआई द्वारा दो किश्तों में करीब 2100 करोड़ रुपये की कटौती कर ली गयी है. जिसके कारण आने वाले समय में भी इस बात की संभावना कम ही नजर आ रही है कि आम उपभोक्ताओं को 100 यूनिट बिजली फ्री में मिल पाएगा.
राज्य के वित्तमंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि सरकार अपनी घोषणा को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन कोरोना संक्रमणकाल में भी केंद्र सरकार की ओर से जिस तरह से सहयोग देने की बजाय नियमों का हवाला देते हुए झारखंड सरकार से राशि काटी गयी है, इससे परेशानी हुई है. इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपने संसाधनों के बलबूते किसानों की ऋणमाफी की घोषणा पूरी की और आने वाले समय में अन्य वायदे भी पूरे किये जाएंगे.
झारखंड में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 40 लाख से अधिक है और उन्हें 13 महीने से इस सौगात का इंतजार है. सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी अपने चुनावी घोषणा पत्र में 100 यूनिट बिजली फ्री देने का वायदा किया था, लेकिन हकीकत में इस दिशा में राज्य सरकार एक कदम भी नहीं बढ़ा सकी है.
दूसरी तरफ झारखंड राज्य विद्युत वितरण निगम लिमिटेड भी 100 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा को फिलहाल अमलीजामा पहनाने में असमर्थ है. पहले से ही बिजली देने वाली कंपनियों का अरबों रुपये का बकाया है और अभी इसके भुगतान में ही कई तरह की कठिनाईयां आ रही है.
ऐसी स्थिति में आम उपभोक्ताओं को बिजली फ्री देने की जगह अब बिजली उपभोक्ताओं को मोबाइल फोन की तरह प्री-पेड बिजली उपलब्ध कराने की योजना तैयार की जा रही है, ताकि यदि उपभोक्ता बिजली बिल देने में थोड़ा भी विलंब करते है, तो उन्हें अंधेरे में रहना पड़ सकता है.

