राष्ट्रीय औसत सलाना 77 हजार रुपये
रांची: झारखंड कृषि प्रधान राज्यों में है. यहां किसानों की संख्या करीब 38 लाख है. मुख्य फसल धान है. यहां एक फसलीय खेती होती है. सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है. कृषि के विकास को प्राथमिकता बताती है. सरकार के लाख प्रयास के बाद भी किसानों की हालत नहीं बदल रही है. उसकी आमदनी में इजाफा नहीं हो रहा है. झारखंड के किसानों की औसत आय राष्ट्रीय औसत से भी कम है.
पांच हजार रुपये भी मासिक आय नहीं
झारखंड के किसानों की सालाना औसत आय 56,652 रुपये है. इस हिसाब से देखें तो उनकी मासिक आय 5 हजार रुपये से भी कम है. एक सर्वे के मुताबिक भारतीय किसान की औसत सालाना आय 77,124 रुपये है. यह एक महीने में महज 6,427 रुपये बनता है.
सिंचाई है सबसे बड़ी समस्या
झारखंड में किसानों की बड़ी समस्या कृषि के लिए पानी नहीं होना है. यहां की अधिकांश खेती मानसून पर आधारित है. औसत बारिश अधिक होने के बाद भी सिंचाई के लिए पानी की समस्या लगातार बनी रहती है. पानी नहीं रोक पाने से बह जाता है. अपने साथ उपजाउ मिट्टी भी बहा ले जाता है. ऐसे में पानी और मिट्टी दोनों के बहाव को रोकना जरूरी है.
अम्लीय भूमि का प्रभाव
राज्य में लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन अम्लीय भूमि (पी.एच. 5.5 से कम) के अन्तर्गत आती है. जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग एवं रांची के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अम्लीय समस्या से ग्रसित है. सिमडेगा, गुमला एवं लोहरदगा में 69-72 प्रतिशत तक अम्लीय भूमि की समस्या है. पलामू, गढ़वा एवं लातेहार में अम्लीय भूमि के क्षेत्र का क्षेत्रफल 16 प्रतिशत से कम है. सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम एवं पश्चिम सिंहभूम में अम्लीय भूमि का क्षेत्रफल 70 प्रतिशत के करीब है.
लघु और सीमांत किसान अधिक
झारखंड में लघु और सीमांत किसानों की संख्या. अधिक है. उनके पास कम जमीन है. इनमें से अधिकतर पारंपरिक विधि से ही खेती करते हैं. इसके कारण उपज की लागत अधिक होती है. बीज-खाद जैसे इनपुट भी महंगे हो गये हैं.
झारखंड में खेती और किसान
किसानों की संख्या : करीब 38 लाख
भौगोलिक क्षेत्र : 79.70 लाख हेक्टेयर
खेती योग्य जमीन : 38 लाख हेक्टेयर
खेती होती है : 25 से 26 लाख हेक्टेयर
वार्षिक वर्षापात : 1300 मिली मीटर
मुख्य फसलें : धान, गेंहू, मक्का, दलहन-तेलहन, सब्जी

