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भूकंप के मामले में साहेबगंज और दामोदर घाटी का क्षेत्र सबसे अधिक संवेदी

by bnnbharat.com
August 27, 2020
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भूकंप के मामले में साहेबगंज और दामोदर घाटी का क्षेत्र सबसे अधिक संवेदी
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  • भूकंपीय तरंगों के कारण भ्रंशों में होती है अधिक सक्रियता

रांचीः झारखंड में  साहेबगंज और दामोदर घाटी का क्षेत्र तुलनात्मक रूप से अधिक संवेदी है. दामोदर घाटी एक तरह की भ्रंश घाटी है. भूकंपीय तरंगों के कारण भ्रंशों में अधिक सक्रियता होती है. इसका कारण यह भी बताया जा रहा है कि नर्मदा घाटी के समीप स्थित जबलपुर में इस तरह की घटना घट चुकी है.

इसके अलावा झारखंड के चार जिले भी डेंजर जोन में  हैं. . पलामू, हजारीबाग, साहेबगंज, गोड्डा और दामोदर नदी घाटी के आस-पास के क्षेत्र को भूकंप के लिये संवेदी स्थल माना गया है. इसका वैज्ञानिकों के शोध में खुलासा हुआ है.

इसकी वजह यह बतायी जा रही है कि इन जगहों पर पाये जाने वाले कैलसाइट की चट्टानें जल्द गर्म हो जाती हैं. इसमें स्टेन एनर्जी प्रोडक्शन की क्षमता काफी अधिक होती है. इस वजह से ये क्षेत्र प्रोन टू अपग्रेड जोन के रूप में परिवर्तित हो गया है.

क्यों आता है भूकंप

धरती के नीचे भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने के कारण भूकंप की स्थिति बनती है. प्लेट टकराने से उत्पन्न दबाव चट्टानों की इलास्टिक (लचीलापन) सीमा को पार कर जाती है. इस वजह से चट्टानें टूट जाती हैं. इससे निकली ऊर्जा चट्टानों में कंपन उत्पन्न करती है.

यही कारण है कि भूकंप की तरंग धरती तक पहुंच जाती हैं. वहीं रांची सेफ जोन में शामिल है. यहां कैलसाइट की चट्टानें कम पाई जाती हैं. क्रिस्टल क्वार्ज्ट चट्टानें अधिक हैं, जो अधिकांश समय ठंढी रहती हैं.

भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटानागपुर का पठार ग्रेनाइट चट्टानों का बैथोलिक है. इसकी कठोरता के कारण कम तीव्रता वाली भूकंपीय तरंग विरूपित नहीं हो पाती हैं. इस कारण भूकंपीय तरंगों का प्रभाव कम होता है.

भूकंप से बचने के लिए क्या हो रहा उपाय

भूकंप से बचने के लिए अमेरिका में निर्माण कार्य में रेन फॉर स्टील का उपयोग किया जा रहा है. जिसमें स्टील का ढांचा बाहर रहता है. इस कारण तरंगों को वह एब्जॉर्ब कर लेता है. चीन और जापान में वूडेन कंस्ट्रक्शन पर जोर दिया जा रहा है. वूडेन कंस्ट्रक्शन भी भूकंपीय तरंगों को एब्जॉर्ब करने में सक्षम है.

वैज्ञानिकों के अनुसार कैलसाइट की चट्टानें जल्द गर्म हो जाती हैं. इसमें स्टेन एनर्जी प्रोडक्शन की क्षमता काफी अधिक होती है. इस वजह से ये क्षेत्र प्रोन टू अपग्रेड जोन के रूप में परिवर्तित हो गये हैं.

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