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106 साल पुरानी काल्पनिक किताब का साकार रुप था परमाणु बम

by bnnbharat.com
February 28, 2020
in समाचार
106 साल पुरानी काल्पनिक किताब का साकार रुप था परमाणु बम
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नयी दिल्लीः द्वीतीय विश्वयुद्ध जब अमेरिका ने जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा कर  अचानक ही युद्ध का रुख मोड़ कर विरोधियों को घुटने पर ला दिया. ये वो समय  था जब दुनिया को एक भीषण और प्रलयंकारी हथियार से साक्षात्कार हुआ था.

लगभग 40 हजार लोगों की मौत का कारण बना यह परमाणु बम इतना भीषण हथियार था कि इसके प्रभाव आज भी देखे जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि  परमाणु बम की परिकल्पना सबसे पहले अंग्रेजी भाषा के साहित्यकार एचजी वेल्स ने की थी? यही सच है.

साल 1914 में एचजी वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ्री’ प्रकाशित हुई. इसमें उन्होंने यूरेनियम से बनने वाले एक ऐसे बम की परिकल्पना की थी जो अनंत काल तक फटता ही रहेगा. कल्पना की गई थी कि इस बम की ताकत भी असीमित होगी.

वेल्स ने तो यहां तक सोच लिया था कि इसे हवाई जहाज से जमीन पर गिराया जाएगा. पर वेल्स ने शायद यह नहीं सोचा था कि उनके एक दोस्त विंस्टन चर्चिल और भौतिक शास्त्र के एक वैज्ञानिक लियो स्जिलर्ड उनकी परिकल्पना को सच्चाई में बदल देंगे.

उस समय यह माना जाता था कि ठोस पदार्थ बहुत ही छोटे छोटे कणों से बना होता है. साइंस म्यूजियम के क्यूरेटर एंड्र्यू नैहम का कहना है, ‘जब यह साफ हो गया कि रदरफोर्ड के परमाणु में सघन न्यूक्लीयस है, तो यह समझा गया कि वह एक स्प्रिंग की तरह है.’

एचजी वेल्स नई-नई खोजों से काफी प्रभावित थे. यह भी देखा गया कि वे आने वाले आविष्कारों के बारे में पहले से ही अनुमान लगा लेते थे, जो कई बार सही साबित होते थे. ब्रिटिश राजनेता चर्चिल ने एचजी वेल्स के नोट्स पढ़े और बहुत ही प्रभावित हुए.

वे खुद भी साहित्यकार थे. उन्होंने वेल्स से मुलाकात भी की थी. नारंगी के आकार के परमाणु बम के बारे में सबसे पहले सोचने का श्रेय ग्राहम फार्मलो को है, लेकिन यह एचजी वेल्स की किताब से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था.

ब्रितानी वैज्ञानिकों ने 1932 में परमाणु को विखंडित करने में कामयाबी हासिल कर ली, हालांकि उस समय भी ज्यादातर लोग यह मानते थे कि इससे बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा नहीं निकल सकती है. उसी साल हंगरी के वैज्ञानिक लियो स्जिलर्ड ने वेल्स की किताब ‘द वर्ल्ड सेट फ्री’ पढ़ी थी.

उन्होंने इस पर यकीन किया कि परमाणु के विखंडन से बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकल सकती है. उन्होंने इस पर एक लेख भी लिखा, जो वेल्स के विचारों के बहुत ही नजदीक था. स्जिलर्ड ने ही सितंबर 1933 में ‘चेन रिएक्शन’ की बात कही थी.

उन्होंने लंदन के रसेल स्क्वैयर पर ट्रैफिक सिग्नल को देखा तो उनके दिमाग में यह बात आई. उन्होंने लिखा, ‘मेरे मन में यकायक यह ख्याल आया कि यदि परमाणु को न्यूट्रॉन से तोड़ा जाए, जिससे दो न्यूट्रॉन निकले और उसमें से एक न्यूट्रॉन निकल कर फिर ऐसा ही करने लगे, तो मुझे लगता है कि न्यूक्लियर ‘चेन रिएक्शन’ शुरू हो जाएगा.’

ठीक इसी समय नाजियों का दबदबा बढ़ रहा था और स्जिलर्ड इससे काफी परेशान थे. साल 1945 में चर्चिल ब्रिटेन का संसदीय चुनाव हार गए. ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने लॉस एलामोस के वैज्ञानिकों को छोटे बजट पर ही सही, परमाणु बम बनाने को कहा.

एचजी वेल्स की मौत 1946 में हो गई. वे उस समय ‘द शेप ऑफ थिंग्स टू कम’ फिल्म पर काम कर रहे थे. उन्होंने उसमें भी इस बम की बात की थी.

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