रांची:- कोरोना महामारी के मार्ग से जहां पूरा विश्व आर्थिक तंगी एवं बेरोजगारी का माल खेल रहा था वहीं भारतीय लोक कल्याण संस्थान ने किसानों को रोजगार दिलाने को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामूहिक खेती के लिए प्रेरित कर आज राजधानी के पिस्का नगरी भंवरा टोली और आसपास के कई गांवों के किसान अब सहजन की व्यवसायिक खेती कर रहे हैं इससे पहले संस्था के सचिव चंद्रदेव सिंह ने किसानों को सामूहिक खेती के फायदे बताएं और उन्हें केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना किसान उत्पादक संगठन के बारे में भी जानकारी दी जिसके परिणाम स्वरूप नेचुरल फॉर मिलो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ऑर्गेनाइजेशन का गठन किया गया और उन्हें कंपनी एक से रजिस्ट्रेशन कराए गए. सामूहिक खेती के लिए सहजन की खेती की योजना बनाई गई तथा इसके लिए दक्षिण भारत से बीज मकाक लगभग 10 एकड़ में करीब 6500 पौधे लगाएंगे और आज फल सभी पेड़ों में फल आ चुके हैं फल तैयार होने से पूर्व इसकी खेती की चर्चा झारखंड के अन्य जिलों में होने लगी और इसकी डिमांड को देखकर खूंटी सिमडेगा लातेहार एवं पाकुड़ सहित कई जिलों के किसानों ने भी सहजन की खेती करने की योजना बनाई दक्षिण भारत से जो बीज मंगाया गया था उनमें चाउ2 चाउ1 और ऑडिसी है एक एक्सपोर्ट क्वालिटी की पौधे थे जो एक पेड़ से करीब 30 किलो फसलें एक बार में मिलेगा साल में तीन बार करीब 90 किलो के आसपास फसल हो सकता है किसानों को अवसर औसतन ₹40 किलो के हिसाब से थोक में बिक्री का अनुमान है इस वक्त बाजार में सहजन ₹100 किलो तक बिका है किसानों की जानकारी किसानों ने जानकारी दी कि जानकारी दी है कि करीब 10 साल तक एक पेड़ फसल दे सकता है
