नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि बैंकों को फिलहाल कर्ज मामले में धीमी वृद्धि की चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है. फिलहाल कर्ज वृद्धि 7 प्रतिशत के आसपास है.
दास ने सालाना बैंक सम्मेलन में कहा कि बैंकों को इस समय जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उसमें कर्ज उठाव में धीमी वृद्धि शामिल है. उन्होंने बैंकों से कर्ज देने के मामले में विवेकपूर्ण रुख अपनाने को कहा. साथ ही यह भी कहा कि आकलन काफी महत्वपूर्ण है.
दास ने कहा कि आरबीआई ने वित्तीय संस्थानों का अलग-अलग विषयों पर अध्ययन का प्रस्ताव किया है. उन्होंने कहा कि शीर्ष 50 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों एनबीएफसी) पर नजर रखी जा रही है. एनबीएफसी के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में छोटे एनबीएफसी का कर्ज प्रवाह सुधरा है. कर्ज प्रवाह स्थिर हुआ है और इसमें धीरे-धीरे सुधार आ रहा है.’
दास ने कहा कि रीयल्टी क्षेत्र में कर्ज प्रवाह में सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों में संचालन का मुद्दा काफी महत्वपूर्ण है और बैंकों के प्रबंधन को संचालन व्यवस्था में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है.
शक्तिकांत दास ने कहा कि कर्ज माफी को ढर्रा बनाया जाना देश के वित्तीय साख के लिए नुकसादायक है और इससे ऋण संस्कृति प्रभावित होती है.
उन्होंने कहा कि कृषि कर्ज से संबंधित कर्ज को लक्षित किया जाना चाहिए. दास ने कहा कि इस प्रकार की कर्ज माफी से किसानों को अगली बार कर्ज मिलने में समस्या होती है. गवर्नर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य प्रकार के संकट के कारण किसानों को राहत लक्षित होना चाहिए.

