जमशेदपुर:- जमशेदपुर सहित कोल्हान के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल आज झारखण्ड स्टेट बार कौंसिल के वाईस चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल से उनके निवास पर मिला तथा अधिवक्ताओ की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल में झारखंड स्टेट बार कौंसिल की सदस्या श्रीमती रिंकू भगत, जिला बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रशासन पवन कुमार तिवारी, हरविलास दास, विजय शंकर पाठक, अक्षय झा, सुनिश पांडेय, लालटू चंद्रा, मिथिलेश सिंह सहित अन्य अधिवक्ता प्रमुख रूप से शामिल थे.
झारखंड स्टेट बार कौंसिल की सदस्या मती रिंकू भगत ने शुक्ल को घाटशिला के अधिवक्ताओ की समस्याओं से उन्हें अवगत कराया. शुक्ल ने वहा शिघ्र चुनाव कराने का निर्देश दिया. अधिवक्ताओ ने श्री शुक्ल से सभी बार भवनों को खोलवाने, युवा अधिवक्ताओ के प्रोत्साहन राशि को बढ़ाने, के साथ साथ फीजिकल कोर्ट कराने के लिए उच्च न्यायालय से वार्ता करने का आग्रह किया. शुक्ल ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी भावनाओं से उच्च न्यायालय को वे अवगत कराएंगे.
शुक्ल जो अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के भी राष्ट्रीय महामंत्री है ने अधिवक्ताओ से आग्रह किया कि वे अपने वेलफेयर स्कीम, और पेंशन योजना का अवश्य सदस्य बने क्योंकि कई बार झारखंड राज्य अधिवक्ता कल्याण निधि न्यास का सदस्य नही रहने और पेंशन योजना का सदस्य नही रहने से कई अधिवक्ताओ और उनके परिजनों को इसका लाभ नही मिल पाता है.
शुक्ल ने बताया कि मार्च से ही कोरोना काल मे अधिवक्ताओ को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है अधिवक्ताओ के सामने व्यावसायिक कार्य नियमित और फिजिकल नही होने से व्यवसाय में आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है . राज्य सरकार के पास दिल्ली सरकार की तर्ज पर झारखंड में भी अधिवक्ताओ का सामुहिक स्वास्थ्य बीमा, आर्थिक अनुदान, और अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का मामला झारखण्ड सरकार के पास विचाराधीन है. जिसके लिए पुनः झारखंड की राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और राज्य के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मिलकर उन्हें शिघ्र इन मामलों का समाधान का आग्रह किया जाएगा तथा झारखंड में भी शिघ्र लागू करने की मांग पुनः की जायेंगी.
शुक्ल ने कहा कि अधिवक्ताओ का गौरवशाली इतिहास रहा है, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक भारतीय राजनीति की धुरी अधिवक्ताओ के इर्द गिर्द घूम रही है लेकिन इस कोरोना काल मे अधिवक्ताओ को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा है. उन्हें व्यवसायिक कार्य निष्पादन में भी भारी कठिनाई सहनी पड़ी है लेकिन अधिवक्ता जगत हर चुनौती में मजबूत होकर सामने आया है और चुनौतियों का सामना किया है. निखरा है और हमे विश्वास है आगे और मजबूत होंगा.

