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देशव्यापी लॉकडाउन पर सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उमीद

तो दूसरी छोटी कंपनियों को खोलने का कोई फायदा नहीं होगा.

by bnnbharat.com
May 4, 2020
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देशव्यापी लॉकडाउन पर सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उमीद

देशव्यापी लॉकडाउन पर सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उमीद

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जमशेदपुर: पूरा देश मे कोरोना महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन पर सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उमीद है. जहां उद्यमी इसके बारे में सोचने में मजबूर हैं. आखिर इससे निपटने के लिए कितना दिन और इन्तेजार करना होगा. हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में सोशल डिस्टेसिंग के अनुपालन के साथ कंपनियों संचालित करने की अनुमति तो दी गई है, लेकिन अगर हम आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की बात करें तो वहां की ज्यादातर कंपनियों, टाटा मोटर्स औऱ टाटा स्टील आदि पर ही निर्भर हैं. यदि टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी कंपनियां नहीं खुलतीं तो दूसरी छोटी कंपनियों को खोलने का कोई फायदा नहीं होगा.

उधर इस संबंध में जानकारी देते हुए उद्यमी एसके बेहरा ने कहा पहले से ही मंदी का माहौल बना हुआ था. लेकिन अब कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन में सभी कंपनियां बंद है. हालांकि लॉक डाउन में सभी मजदूरों का खयाल रखा जा रहा हैं. मंदी के कारण जिस तरह से लोगों को वेतन मिल रहा था वैसे ही लॉक डाउन में भी मैनेज किया जा रहा है. इस दौरान किसी को हटाया नहीं गया. हम सभी का मानना है कि इस परिस्थिति में भी सबका घर चलना चाहिए. उधर उद्यमी बेहरा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कहे रहे इंडस्ट्री का हो रही नुकसान को लेकर कमेटी बनी है, बैंक से कैसे कम्पनियो को सहुलियत मिल सके इशपर विचार हो रहा है. हालांकि उन्होंने बात चीत के दौरान कहा आर्थिक परेशानी बड़ने की उमीद जता रही है. वैसे मई-जून के बाद ही इसके प्रभाव का पता चल पाएगा. उस वक्त सोचना होगा कि हम सभी परेशानी को कैसे झेलेंगे पाएंगे या उस वक्त इसे कैसे सुलझा पाएंगे.

उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता मनोज यादव ने कहा कि कोरोना से पूरा देश जूझ रहा है. उधर रोजगार भी एक चिंता का विषय बना है. भारत का 46 प्रतिशत खनिज झारखंड में हैं, लेकिन हमारे इंडस्ट्री का धुआं न निकले औऱ पड़ोस की इंडस्ट्री गुलजार हो, अब ऐसा नहीं होगा. अब झारखंड की इंडस्ट्री में धूंआ निकलेगा और यहां के लोगों के साथ ही बाहर से भी मजदूर आएंगे रोजगार के लिए झारखंड. उन्होंने कहा झारखंड में कोयला औऱ लोहे की खदान चालू होगी तो मजदूरों को काम मिलेगा. झारखंड के लोगों को झारखंड में ही रोजगार देने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री इसके लिए प्रयासरत हैं. उनका कहना हैं जो मजदूर स्किल्ड हैं या जिनमें क्षमता है वे बाहर भी जा सकते है. लेकिन उन्हें हम रोक नहीं सकते, झारखंड सरकार प्रतिबद्ध है सभी मजदूरों को झारखंड में ही रोजगार मिले ऐसा व्यवस्था करने के लिए प्रयास की जा रही है.

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