रांचीः स्वच्छ भारत मिशन के तहत पोलिटिकल लीडरशीप में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रयासों को सराहा गया है. स्वच्छ भारत मिशन के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार द्वारा “द स्वच्छ भारत रिवोल्यूशन पुस्तक” जारी की गयी है. इसमें पांच सालों के दौरान स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े लोगों के अनुभवों को साझा किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पुस्तक की प्रस्तावना लिखी है. इसी पुस्तक में पोलिटिकल लीडरशीप चैप्टर में पहले आलेख के रुप में मुख्यमंत्री रघुवर दास के आलेख को स्थान दिया गया है. इस किताब का संपादन केंद्रीय पेयजल स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर ने किया है. झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री को पुस्तक की प्रति पेयजल स्वच्छता विभाग की सचिव अराधना पटनायक ने भेंट की. यह प्रति अय्यर ने विशेष तौर पर मुख्यमंत्री को भेजी है.
देश में पहली बार रानी मिस्त्री के माध्यम से महिलाओं को भी शौचालय निर्माण से जोड़ा गया. पुस्तक में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि राज्य में जन-जन की भागीदारी से किस प्रकार स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाया गया है. इसमें देश में पहली बार रानी मिस्त्री के माध्यम से महिलाओं को भी शौचालय निर्माण से जोड़ा गया. इसी प्रकार शौचालयों पर आकर्षक पेंटिंग करायी गयी. झारखंड में वर्ष 2018 के जनवरी-फरवरी में किस प्रकार में स्वच्छता संकल्प अभियान चलाकर 15 लाख ग्रामीण महिलाओं को जोड़कर 3.5 लाख शौचालयों का निर्माण कराया गया. इसी प्रकार जून में 11 दिनों के भीतर एक लाख ग्रामीण घरों में शौचालय बनाये गये.
मुख्यमंत्री के शब्दों में (आलेख से उदृत कुछ मुख्य बातें) :
2014 में जब हम सरकार में आये, तो राज्य की 80 प्रतिशत जनता के शौचालय की सुविधा नहीं थी. इस कारण लोगों को कई प्रकार की बीमारियां होती रहती थी. लड़कियों व महिलाओं को भी शौचालय नहीं होने के कारण कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता था. प्रधानमंत्री ने देशव्यापी इस समस्या को हाथों-हाथ लिया और स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया. राज्य के मुख्य सेवक के तौर पर लोगों को इन परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए इस अभियान में प्रशासनिक तंत्र को लगा दिया.
प्रकृति के अनुकूल हमने ट्वीन पिट शौचालय तकनीक को बढ़ावा दिया
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि हमारे लिए यह लंबा सफर था. दो करोड़ लोगों को पुरानी विचारधारा से बाहर निकाल कर शौचालय के उपयोग के लिए प्रेरित करना था. स्वच्छता हमारे लिए केवल शौचालय बनाना नहीं था, बल्कि झारखंड को स्वच्छ और स्वस्थ राज्य बनाना है. हमारे यहां हर जिले व गांव में स्वच्छ अधिकारी हैं, जो लोग शौचालय का इस्तेमाल करें, यह सुनिश्चित करते हैं. हमारे स्वच्छाग्रही व जल सहिया बहनों ने इसमें अहम भूमिका अदा की है. झारखंड के प्रकृति के अनुकूल हमने ट्वीन पिट शौचालय तकनीक को बढ़ावा दिया. इनका रखरखाव भी काफी आसान है. मिस्त्री की कमी को पूरा करने के लिए हमने 70 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रानी मिस्त्री बनाया. इसके साथ ही 38 हजार महिलाओं को स्वच्छाग्रही बनाया गया, जो लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम कर रही हैं. झारखंड के स्कूलों, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य केंद्रों पर हर माह की 19 तारीख को स्वच्छता दिवस मनाया जाता है. हर माह की दो तारीख को सभी ग्राम पंचायतों में स्वच्छता सभा आयोजित की जाती है.
केंद्र सरकार द्वारा हर संभव मदद मिली
हमने अपना वादा पूरा करते हुए 15 नवंबर 2018 को झारखंड को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया. यह सफलता प्रधानमंत्री के राजनैतिक नेतृत्व के कारण संभव हो पायी है. उनके निर्देश के कारण केंद्र सरकार द्वारा इसमें हर संभव मदद की गयी. प्रधानमंत्री की प्रेरणा और हमारे सवा तीन करोड़ झारखंडवासियों के उत्साह को देखते हुए मैं यह कह सकता हूं कि हम ओडीएफ प्लस अभियान में भी अग्रणी भूमिका निभायेंगे.

