रांची: पूर्वी सिंहभूम जिले के कवाली थाना के चाकड़ी पंचायत अंतर्गत नाचोसाई गांव में विगत एक वर्ष से लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा जमीन का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है. यहां सरकार से लीज पर जमीन लेकर कंपनी मनमाने ढंग से पत्थर खनन कर रही हैं. जिसमें नियमों को ताक में रखकर कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में आदिवासियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है.
कंपनी के खनन कार्य से आदिवासियों के जाहेर थान, श्मशान घाट, उपजाऊ भूमि को काफी नुकसान पहुंच रही है. इससे आदिवासी समुदाय के लोग काफी आक्रोशित हैं तो वहीं अबतक कंपनी के मनमानी पर रोक लगाने में असफल होने से खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं. उपरोक्त बातें जल, जंगल, जमीन यानी प्रकृति की रक्षा करने वाले आदिवासी समुदाय के लोग स्वयं कह रहे हैं.
बुधवार को ग्रामीणों ने लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी के कारनामों के खिलाफ नाचोसाई गांव में एक बैठक की. जिसमें बतौर मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के भांजा कपूर टुडू उर्फ कपूर बागी शामिल हुए. बैठक में यह तमाम बातें उभर कर सामने आई है कि किस तरह से कंपनी द्वारा नियमों के विरुद्ध खनन किया जा रहा है. बैठक में कपूर टुडू ने ग्रामीणों से कहा कि सभी लोग एकजुट रहें.
आदिवासियों के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने ग्रामीणों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर कहा कि जल्द इस मामले को लेकर उपायुक्त एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के खिलाफ स्थानीय पुलिस, अंचल कार्यालय, खनन विभाग, विधायक संजीव सरदार से शिकायत कर चुके हैं लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व के रघुवर सरकार ने बिना वस्तुस्थिति जाने समझे कंपनी को जमीन लीज पर दे दिया था, जिसका खामियाजा आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है.
क्या कहते हैं ग्रामीण:
शामू सरदार (ग्रामप्रधान) का कहना है कि फर्जी तरीके से ग्रामसभा का कोरम पूरा कर सरकारी भूमि पर कंपनी ने लीज लिया है. वहीं, मनमुताबिक पत्थर खनन किया जाता है. ब्लास्टिंग करने से पत्थरों के टुकड़े और डस्ट खेतों पर गिरते हैं. इससे फसल बर्बाद हो रहे हैं. स्थानीय विधायक से लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है लेकिन कोई सुनता ही नहीं.
अभिराम सरदार का आरोप है कि जिला प्रशासन के सहयोग से ही लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी नियमों का उलंघन कर रहा है. प्रशासन का सहयोग है इसलिए कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नहीं है.
सुकरा सरदार ने बताया कि गांव के कुछ रैतदार से कृषि जमीन खरीद कर कंपनी उसमें व्यवसायिक उपयोग कर रही है. कृषि जमीन को अपने फायदे के लिए सड़क बनाया है. जिसमें भारी वाहनों की आवाजाही होती हैं जो कि उपजाऊ खेतों के बीच से होकर गुजरती है. इससे सड़क किनारे के सभी खेत बर्बाद हो गए हैं.
रामसिंह सरदार ने कहा कि कंपनी के लीज क्षेत्र के बगल आदिवासियों का पूजा स्थल जाहेर थान एवं श्मशान भूमि है. अब धीरे धीरे लीज क्षेत्र के बाहर पत्थर खनन करना शुरू कर दिया है.
शांति सरदार तथा बासनी सरदार समेत अन्य महिलाओं ने बताया कि पत्ता चुनने, गाय – बकरी चराने वे खेतों में काम करने के दौरान अचानक ब्लास्टिंग कर दिया जाता है. जिससे पत्थर के टुकड़े आकर उनके ऊपर गिरते हैं. इसलिए अब खेतों की ओर जाना भी बंद कर दिया है.

